जम्मू-कश्मीर: 12 दूरदराज़ इलाकों में लगेंगे नए मोबाइल टावर, सरकार ने दी ज़मीन को मंज़ूरी
जम्मू-कश्मीर में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से दूर कई सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में अब संचार क्रांति की उम्मीद जगी है। प्रदेश सरकार ने 12 कम कवरेज वाले क्षेत्रों में नए मोबाइल टावर लगाने के लिए ज़मीन…
जम्मू-कश्मीर में मोबाइल नेटवर्क की पहुंच से दूर कई सीमावर्ती और पिछड़े इलाकों में अब संचार क्रांति की उम्मीद जगी है। प्रदेश सरकार ने 12 कम कवरेज वाले क्षेत्रों में नए मोबाइल टावर लगाने के लिए ज़मीन हस्तांतरण को हरी झंडी दे दी है, जिससे हाई-स्पीड टेलीकॉम कवरेज का विस्तार होगा। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य दूरदराज़ के गांवों को डिजिटल दुनिया से जोड़ना और डिजिटल खाई को पाटना है।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इसकी घोषणा करते हुए बताया कि यह कदम यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड (USOAF) के तहत उठाया जा रहा है। उन्होंने कहा, "यह पहल दूरदराज और सीमावर्ती गांवों में कनेक्टिविटी को मजबूत करेगी, ऑनलाइन शिक्षा और ई-गवर्नेंस सेवाओं तक पहुंच में मदद करेगी, आपातकालीन संचार में सुधार करेगी और डिजिटल खाई को पाटेगी।"
किन इलाकों को मिलेगा फ़ायदा?
सरकारी मंज़ूरी के बाद भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) के नए टावर लगाए जाएंगे। जिन 12 क्षेत्रों को इस योजना के लिए चुना गया है उनमें उरी, तंगमर्ग, करनाह, कालाकोट, करालपोरा, बसंतगढ़, खौड़, लट्टी मरोटी, बनिहाल, पोगल परिस्तान, रामसू और किला दरहाल शामिल हैं। इन इलाकों में लंबे समय से नेटवर्क की समस्या बनी हुई थी।
जम्मू-कश्मीर में कनेक्टिविटी की वर्तमान स्थिति
प्रदेश के बड़े शहरों और राजमार्गों पर मोबाइल नेटवर्क काफी अच्छा है, लेकिन दूरस्थ इलाकों में अभी भी बुनियादी ढांचे का विस्तार जारी है।
आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की शुरुआत तक जम्मू-कश्मीर के कुल 6,474 गांवों में से 6,226 गांवों तक मोबाइल नेटवर्क पहुंच चुका है, जबकि 248 गांव अब भी बिना नेटवर्क के हैं। कवरेज की बात करें तो 6,208 गांवों में 4जी, 3,704 गांवों (मुख्यतः शहरी) में 5जी, 530 में 3जी और 6,030 गांवों में 2जी सेवा उपलब्ध है। प्रदेश में जियो, एयरटेल और बीएसएनएल के पोस्टपेड कनेक्शन काम करते हैं, लेकिन सुरक्षा नियमों के कारण बाहर के प्रीपेड सिम आमतौर पर नहीं चलते।
इनपुट: IANS



