केरल में AIIMS स्थापना पर हाईकोर्ट की केंद्र से कड़ी पूछताछ, बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को बाधा मानने पर उठाए सवाल
केरल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना के प्रस्ताव पर लंबे समय से कोई प्रगति न होने पर केरल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख पर तीखे सवाल किए हैं। बुधवार को एक सुनवाई के दौरान…
केरल में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की स्थापना के प्रस्ताव पर लंबे समय से कोई प्रगति न होने पर केरल हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार के रुख पर तीखे सवाल किए हैं। बुधवार को एक सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर हैरानी जताई कि क्या राज्य की बेहतर स्वास्थ्य सेवा ही इस प्रतिष्ठित संस्थान की स्थापना में एक बाधा बन गई है।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश सौमेन सेन और न्यायमूर्ति श्याम कुमार की खंडपीठ ने प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (PMSSY) के तहत केरल में एम्स की मांग करने वाली याचिकाओं पर यह टिप्पणी की। केंद्र सरकार ने दलील दी कि प्राथमिकता उन राज्यों को दी जा रही है जहाँ स्वास्थ्य का बुनियादी ढाँचा कमजोर है, जबकि केरल में चिकित्सा सुविधाएँ पहले से ही काफी बेहतर हैं।
अदालत के तीखे सवाल
केंद्र के इस तर्क को अदालत ने गंभीरता से लेते हुए पूछा कि क्या इसका मतलब यह है कि केरल को एम्स की आवश्यकता ही नहीं है। पीठ ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या राज्य में बड़ी संख्या में निजी अस्पतालों का होना एक "अयोग्यता" मानी जा सकती है। जनसंख्या घनत्व की ओर इशारा करते हुए पीठ ने कहा, "यहाँ निजी अस्पताल अधिक हैं। क्या यह अयोग्यता है?"
अदालत ने केंद्र द्वारा बताए गए मानदंडों पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा कि दिल्ली जैसे समृद्ध क्षेत्रों में भी एम्स स्थापित किए गए हैं। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि केरल किन विशिष्ट मानदंडों को पूरा करने में विफल रहा है।
एक दशक पुराना है प्रस्ताव
अदालत ने इस बात पर गौर किया कि केरल में एम्स की स्थापना का प्रस्ताव लगभग एक दशक से लंबित है। इस दौरान राज्य ने कई बार संस्थान के लिए भूमि का चयन भी किया है। अक्टूबर 2025 में राज्य ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को एक ज्ञापन सौंपकर कोझिकोड के किनालूर में एम्स के लिए मंजूरी की मांग की थी।
हालांकि, केंद्र ने स्पष्ट किया कि भूमि का चयन करना औपचारिक आवंटन या मंजूरी नहीं माना जा सकता। गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने जुलाई में संसद को बताया था कि केरल में एम्स के लिए अभी तक कोई सैद्धांतिक मंजूरी नहीं दी गई है। पीठ ने केंद्र सरकार को मामले की समीक्षा करने और जरूरी कदम उठाने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई के लिए छह सप्ताह बाद की तारीख तय की है।
स्वास्थ्य मॉडल पर भी काम कर रहा केरल
यह बहस ऐसे समय में हो रही है जब केरल सरकार अपनी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को पारंपरिक उपचार-केंद्रित मॉडल से आगे ले जाने का प्रयास कर रही है। बुधवार को ही राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय 'केरल समग्र स्वास्थ्य, कल्याण और दीर्घायु मॉडल' कार्य बल का गठन किया है। यह कार्य बल बीमारी की रोकथाम, शीघ्र निदान और स्वस्थ वृद्धावस्था को शामिल करते हुए एक व्यापक मॉडल पर काम करेगा और दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगा।
इनपुट: IANS



