मंगलवार, 3 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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जेपी नड्डा का विपक्ष पर हमला, कहा- कांग्रेस और सपा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता घटा रहे हैं

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को कम करने का आरोप लगाया है। समाचार…

जेपी नड्डा का विपक्ष पर हमला, कहा- कांग्रेस और सपा चुनाव आयोग की विश्वसनीयता घटा रहे हैं
(फोटो: IANS)

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को कम करने का आरोप लगाया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश के बरेली में मंगलवार को भाजपा की 'लोकतंत्र बचाओ, अराजकता दूर करो' रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने इन दोनों दलों को 'गैर-जिम्मेदार' बताया।

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नड्डा ने कहा कि भारत के चुनाव आयोग और सर्वोच्च न्यायालय ने वर्षों की मेहनत के बाद वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बनाई है, लेकिन कांग्रेस और सपा जैसी पार्टियां जनता के भरोसे को तोड़ने की कोशिश कर रही हैं। उन्होंने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए उनकी तुलना उन स्कूली छात्रों से की जो परीक्षा में कम अंक आने पर अपने शिक्षकों को दोष देते हैं। उन्होंने कहा, “जब भी राहुल चुनाव हारते हैं तो चुनाव आयोग को दोष देते हैं, जबकि चुनाव जीतने पर खुद को होशियार समझते हैं।”

विवादित मतदाता सूची और घुसपैठ का मुद्दा

मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) पर विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए जेपी नड्डा ने दावा किया कि हटाए गए 13 करोड़ मतदाता वास्तव में 'अनुपस्थित, स्थानांतरित, डुप्लिकेट या मृत' (एएसडीडी) श्रेणी के थे। उन्होंने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा, “तीन करोड़ मतदाता अनुपस्थित थे, छह करोड़ 30 लाख मतदाता स्थानांतरित किए गए थे और एक करोड़ मतदाता फर्जी थे। दो करोड़ 80 लाख मतदाता मृत थे।” नड्डा ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध मतदाताओं का पता लगाकर उन्हें सूची से हटाने का निर्देश दिया है, जबकि कांग्रेस ऐसे मतदाताओं को मान्यता देना चाहती है।

कांग्रेस के अतीत पर उठाए सवाल

अपने भाषण में भाजपा के पूर्व अध्यक्ष ने कांग्रेस के पिछले रिकॉर्ड पर भी सवाल उठाए। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी द्वारा लगाए गए आपातकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उस दौरान बिना मुकदमे के जेल भेजे गए लोगों की संख्या ब्रिटिश शासन से भी ज्यादा थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा इंदिरा गांधी का चुनाव रद्द करने के बाद उन्होंने कानून में बदलाव कर 'प्रतिबद्ध न्यायपालिका' की मांग की थी। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार ने ही मतपत्रों की जगह ईवीएम प्रणाली को अपनाया था और अब वही लोग मशीनों पर सवाल उठा रहे हैं।

चुनाव आयोग की निष्पक्षता और संवैधानिक पद

नड्डा ने चुनाव आयोग के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि संस्था ने गुजरात के गिर वन और अरुणाचल प्रदेश के मालोगम जैसे दुर्गम इलाकों में भी मतदान सुनिश्चित कराया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भाजपा सरकार ने ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद चुनाव आयुक्त के चयन में विपक्ष के नेता को शामिल किया। इसके विपरीत, उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकारों ने टीएन शेषन, एमएस गिल और नवीन चावला जैसे चुनाव आयोग के सदस्यों को अपने पक्ष में फैसले लेने के लिए पुरस्कृत किया था।

इनपुट: IANS

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News4Social राजनीति डेस्क

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