बीमा सेक्टर में बड़े बदलाव की तैयारी, IRDAI के नए नियमों से ग्राहकों को कैसे होगा फायदा?
भारत के बीमा क्षेत्र में जल्द ही एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा फायदा पॉलिसीधारकों को मिलने की उम्मीद है। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने कुछ नए नियमों का…
भारत के बीमा क्षेत्र में जल्द ही एक बड़ा संरचनात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है, जिसका सीधा फायदा पॉलिसीधारकों को मिलने की उम्मीद है। बीमा नियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने कुछ नए नियमों का प्रस्ताव रखा है, जिनका उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, लागत कम करना और पॉलिसी की गलत बिक्री पर रोक लगाना है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, विशेषज्ञों का मानना है कि इन प्रस्तावित बदलावों से देश का पूरा इंश्योरेंस इकोसिस्टम बदल सकता है।
नियामक ने बीमा वितरण प्रणाली में सुधार के लिए एक आसान, तीन-स्तरीय ढांचे का प्रस्ताव दिया है। इसका सबसे बड़ा मकसद ग्राहकों के हितों की रक्षा करना और बाजार को अधिक टिकाऊ बनाना है। हालांकि, इससे बैंकों और NBFCs जैसे बीमा वितरकों के मार्जिन पर तत्काल दबाव पड़ सकता है।
क्या हैं अहम प्रस्ताव?
IRDAI द्वारा जारी कंसल्टेशन पेपर में बीमा उत्पादों के अनुसार कमीशन की सीमा तय करने की बात कही गई है। इसका एक बड़ा असर मोटर इंश्योरेंस पर पड़ेगा। नए प्रस्तावों के मुताबिक, नए वाहनों के मोटर इंश्योरेंस में थर्ड-पार्टी प्रीमियम पर कमीशन शून्य करने और गाड़ी को होने वाले नुकसान (own damage) से जुड़े कवर पर इसे 5 प्रतिशत तक सीमित करने का सुझाव है। इससे मौजूदा मोटर इंश्योरेंस सर्विस प्रोवाइडर (MISP) सिस्टम की जगह एक नया इंश्योरेंस डिस्ट्रीब्यूशन एंटिटी (IDE) सिस्टम ले लेगा।
डेलॉइट इंडिया के पार्टनर देबाशीष बनर्जी ने कहा, "आखिरकार, इस प्रस्ताव का मकसद डिजिटल तरीकों को अपनाना, पॉलिसी को लंबे समय तक बनाए रखना और एक ऐसा मार्केट बनाना है जो टिकाऊ हो और ग्राहकों को प्राथमिकता दे। जैसा कि कहा जाता है, 'जरूरत ही आविष्कार की जननी है', और ये बदलाव कंपनियों को नए तरीके सोचने और अपनाने के लिए मजबूर करेंगे।"
डीलरों की मनमानी पर लगेगी रोक
प्रस्तावों का एक अहम मकसद बीमा की बिक्री को वाहन डीलर से जुड़े अन्य संबंधों से अलग करना है। इसके लागू होने के बाद डीलर सिर्फ इसलिए कैशलेस मरम्मत से इनकार नहीं कर पाएंगे क्योंकि ग्राहक ने बीमा किसी और कंपनी से खरीदा है। डीलरों को गाड़ी बेचते समय ग्राहकों को 'बीमा सुगम' जैसे डिजिटल विकल्पों के बारे में भी साफ तौर पर बताना होगा।
शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी की पार्टनर शैलजा लाल के मुताबिक, "इन बदलावों का ऑटोमोबाइल डीलरों, ओईएम से जुड़े ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंपनियों और मोटर इंश्योरेंस बेचने वाले अन्य लोगों पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा। नई गाड़ियों की पॉलिसी से होने वाली शुरुआती कमाई कम होने और डीलर से जुड़े समझौतों के कड़े होने से, डिस्ट्रीब्यूशन मार्जिन और कम हो सकता है।" उन्होंने यह भी कहा कि आय का दबाव वितरकों को पॉलिसी रिन्यूअल और अन्य सेवाओं पर ज्यादा ध्यान देने के लिए प्रेरित कर सकता है।
अन्य बीमा पॉलिसियों पर भी असर
ये प्रस्ताव सिर्फ मोटर इंश्योरेंस तक सीमित नहीं हैं। कंसल्टेशन पेपर में सभी तरह के जनरल इंश्योरेंस कमीशन पर सीमा लगाने की बात है। हेल्थ इंश्योरेंस के लिए पहली बार के कमीशन को 15 से 20 प्रतिशत के बीच और रिन्यूअल पर इसे 5 से 10 प्रतिशत तक सीमित करने का प्रस्ताव है। इसी तरह, वितरकों के लिए पहले साल का कमीशन 5 से 20 प्रतिशत के बीच रखने का सुझाव है, जो कि प्रमोशनल खर्चों को मिलाकर मिलने वाले 60 प्रतिशत तक के भुगतान से काफी कम है।
इनपुट: IANS



