गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय रियल एस्टेट में बढ़ा घरेलू निवेशकों का भरोसा, जनवरी-सितंबर में कुल निवेश 5.9 अरब डॉलर पर पहुंचा

वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी और पूंजी निवेश को लेकर दुनिया भर में बरती जा रही सावधानी के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है। कोलियर्स इंडिया की एक नई रिपोर्ट…

भारतीय रियल एस्टेट में बढ़ा घरेलू निवेशकों का भरोसा, जनवरी-सितंबर में कुल निवेश 5.9 अरब डॉलर पर पहुंचा
(फोटो: IANS)

वैश्विक अर्थव्यवस्था में नरमी और पूंजी निवेश को लेकर दुनिया भर में बरती जा रही सावधानी के बावजूद भारतीय रियल एस्टेट सेक्टर में निवेशकों का विश्वास मजबूत बना हुआ है। कोलियर्स इंडिया की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत में साल 2026 के पहले नौ महीनों (जनवरी-सितंबर) में संस्थागत रियल एस्टेट निवेश 5.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 39% की बढ़ोतरी दिखाता है।

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समाचार एजेंसी IANS के हवाले से जारी इस रिपोर्ट की सबसे खास बात यह है कि इस निवेश में घरेलू निवेशकों की हिस्सेदारी विदेशी निवेशकों से कहीं ज़्यादा रही है। कुल 5.9 अरब डॉलर के निवेश में से 3.5 अरब डॉलर, यानी लगभग 60%, भारतीय निवेशकों ने ही लगाया है। पिछले साल के मुकाबले घरेलू पूंजी के प्रवाह में 59% की शानदार वृद्धि दर्ज की गई है, जो भारतीय रियल एस्टेट बाजार की मजबूती और परिपक्वता का संकेत है।

विदेशी और घरेलू निवेश की प्राथमिकताएं

विदेशी निवेश में भी 17% की वृद्धि देखी गई और यह आंकड़ा करीब 2.4 अरब डॉलर रहा। रिपोर्ट के मुताबिक, विदेशी निवेशक खासतौर पर ऐसे प्रोजेक्ट्स में पैसा लगा रहे हैं जो अभी विकास के चरण में हैं। उनका ध्यान हॉस्पिटैलिटी, वैकल्पिक (alternative) और मिक्स्ड-यूज़ जैसी संपत्तियों से लंबी अवधि में फायदा कमाने पर केंद्रित है।

वहीं, कोलियर्स इंडिया के सीईओ और मैनेजिंग डायरेक्टर बादल याग्निक ने बताया कि घरेलू निवेशक मुख्य रूप से कोर संपत्तियों (core assets) को प्राथमिकता दे रहे हैं। 2026 की तीसरी तिमाही में घरेलू निवेशकों ने कुल 0.9 अरब डॉलर का निवेश किया, जो उस तिमाही के कुल निवेश का लगभग दो-तिहाई था। इस घरेलू निवेश का 46% हिस्सा आवासीय और ऑफिस सेगमेंट में गया।

निवेशकों के लिए कौन-से सेगमेंट रहे पसंदीदा?

नौ महीने की अवधि में सबसे ज़्यादा निवेश ऑफिस संपत्तियों में आया, जिसकी कुल निवेश में 37% हिस्सेदारी रही। अच्छी क्वालिटी वाले 'ग्रेड ए' ऑफिस स्पेस की लगातार बढ़ती मांग और लीजिंग गतिविधियों ने इसे निवेशकों के लिए आकर्षक बनाए रखा है। ऑफिस के बाद मिक्स्ड-यूज़ और वैकल्पिक संपत्तियों का स्थान रहा, जिनमें से प्रत्येक की हिस्सेदारी 16-17% थी।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2026 की तीसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में कुल निवेश 1.4 अरब डॉलर रहा। यह पिछले साल की इसी तिमाही से 12% ज़्यादा है, लेकिन पिछली तिमाही (अप्रैल-जून) के मुकाबले इसमें 51% की कमी आई है। अगर शहरों की बात करें, तो कुल निवेश का लगभग एक-तिहाई हिस्सा बेंगलुरु, चेन्नई और दिल्ली-एनसीआर में हुआ।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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