UPI पर शुल्क की तैयारी: एक दशक तक मुफ़्त रहने के बाद अब क्यों बदल सकती है तस्वीर?
भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) शुरू होने के लगभग एक दशक बाद अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बड़े…
भारत की डिजिटल भुगतान क्रांति की रीढ़ बन चुका यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) शुरू होने के लगभग एक दशक बाद अब एक बड़े बदलाव की ओर बढ़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार बड़े व्यापारियों से इसके इस्तेमाल पर शुल्क लगाने पर विचार कर रही है, ताकि इस प्रणाली को लंबे समय तक टिकाऊ बनाया जा सके और इसके संचालन में आ रही लागत की भरपाई हो सके।
UPI लेनदेन की संख्या के मामले में दुनिया की सबसे बड़ी रिटेल फास्ट-पेमेंट प्रणाली है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, इसने न केवल भारत में डिजिटल क्रांति को तेज़ किया, बल्कि आबादी के एक बड़े हिस्से को औपचारिक अर्थव्यवस्था से जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाई है। सरकारी आंकड़े इसकी ज़बरदस्त वृद्धि को दर्शाते हैं। वित्त वर्ष 2016-17 में जहाँ सिर्फ़ 1.78 करोड़ UPI लेनदेन हुए थे, वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 241.62 अरब तक पहुँच गई। इसी दौरान, लेनदेन का कुल मूल्य भी 7,000 करोड़ रुपए से बढ़कर 3.14 लाख करोड़ रुपए हो गया।
शुल्क से क्या बदलेगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि शुल्क लगाने से आय का एक स्थायी स्रोत बनेगा। यह बैंकों और भुगतान कंपनियों को साइबर सुरक्षा, धोखाधड़ी का पता लगाने और विवादों के समाधान जैसे क्षेत्रों में और अधिक निवेश करने के लिए प्रोत्साहित करेगा। इसके अलावा, इससे UPI के अगले चरण के विकास में भी मदद मिलेगी, जिसमें क्रेडिट लाइन उपलब्ध कराना और सीमा-पार भुगतानों का विस्तार करना शामिल हो सकता है।
फिनटेक कंपनी बिज2क्रेडिट के सह-संस्थापक और सीईओ रोहित अरोड़ा ने रिपोर्ट में कहा है, "इतने वर्षों तक मुफ्त इस्तेमाल के बाद व्यापारियों से कुछ लागत वसूलना अपरिहार्य था।" दरअसल, एक सुरक्षित और विशाल भुगतान नेटवर्क बनाने और चलाने में काफी लागत आती है, जैसी चुनौती का सामना अन्य देश भी करते हैं। उदाहरण के लिए, इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देशों में व्यापारियों की श्रेणी और लेनदेन के आकार के आधार पर शुल्क की अलग-अलग दरें लागू हैं।
वैश्विक स्तर पर UPI की सफलता
UPI की सफलता का मॉडल एशिया और ग्लोबल साउथ के कई देशों के लिए एक मिसाल बन गया है। एक विशेषज्ञ के हवाले से कहा गया, "एशिया और ग्लोबल साउथ की कई भुगतान प्रणालियों ने UPI का अध्ययन इसलिए किया है क्योंकि इसने साबित किया कि वीज़ा, मास्टरकार्ड या किसी विदेशी बोर्डरूम को भुगतान स्विच का नियंत्रण दिए बिना भी बड़े पैमाने पर प्रणाली का विस्तार किया जा सकता है।"
आज UPI नेटवर्क सिंगापुर, फ्रांस, यूएई, ग्रीस और श्रीलंका सहित 11 देशों में काम कर रहा है। इससे भारतीय पर्यटकों, कारोबारियों और छात्रों को इन देशों में सीधे अपने भारतीय बैंक खातों से भुगतान करने की सुविधा मिलती है, जिससे विदेशी मुद्रा मार्कअप और अंतरराष्ट्रीय कार्ड पर निर्भरता कम होती है।
इनपुट: IANS



