शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: अब एक अरब से ज़्यादा लोग दायरे में, जानिए क्या हैं बड़े बदलाव

भारत में पिछले कुछ सालों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में एक बड़ी छलांग देखने को मिली है, जिसके तहत अब देश के एक अरब से भी ज़्यादा नागरिक इसके अंतर्गत आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी एक…

भारत में सामाजिक सुरक्षा का विस्तार: अब एक अरब से ज़्यादा लोग दायरे में, जानिए क्या हैं बड़े बदलाव
(फोटो: IANS)

भारत में पिछले कुछ सालों में सामाजिक सुरक्षा के दायरे में एक बड़ी छलांग देखने को मिली है, जिसके तहत अब देश के एक अरब से भी ज़्यादा नागरिक इसके अंतर्गत आ गए हैं। समाचार एजेंसी IANS की ओर से जारी एक सरकारी फैक्टशीट के अनुसार, सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 के 19 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 68.4 प्रतिशत तक पहुँच गया है, जो एक उल्लेखनीय विस्तार को दर्शाता है।

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इस विस्तार का एक बड़ा हिस्सा कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के बढ़ते आधार से जुड़ा है। 2014-15 में जहाँ ईपीएफओ के सदस्यों की संख्या 3.49 करोड़ थी, वहीं 16 सितंबर 2026 तक यह आंकड़ा दोगुने से भी ज़्यादा होकर 7.98 करोड़ पर पहुँच गया। इस अवधि में लगभग 4.49 करोड़ नए सदस्य संगठन से जुड़े हैं।

ईपीएफओ के बढ़ते कदम: वेतन सीमा से लेकर निकासी तक

ईपीएफओ कवरेज में विस्तार के लिए वेतन सीमा में भी महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। सितंबर 2014 में अनिवार्य कवरेज के लिए वेतन सीमा को 6,500 रुपये से बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रति माह किया गया था। अब, सितंबर 2026 में इसे एक बार फिर बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह करने की मंजूरी दी गई है। इस कदम से 51 लाख से अधिक अतिरिक्त कर्मचारियों को अनिवार्य रूप से सामाजिक सुरक्षा का लाभ मिलने की उम्मीद है।

सदस्यों को बेहतर और तेज़ सेवा देने के लिए भी कई सुधार किए गए हैं। पिछले एक साल (अक्टूबर 2026 तक) में ईपीएफओ ने 6.42 करोड़ दावों का निपटारा किया, जबकि 2014-15 में यह संख्या सिर्फ 1.30 करोड़ थी। इसके अलावा, पात्र अग्रिम दावों के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को 5 लाख रुपये तक बढ़ा दिया गया है, जिससे पैसे की निकासी बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के तेज़ी से हो सकेगी।

पेंशनभोगियों और पीएफ निकासी में आसानी

बढ़ते सदस्यों के साथ-साथ पेंशन पाने वालों की संख्या में भी इज़ाफ़ा हुआ है। 2014-15 में ईपीएफओ से 51.04 लाख लोग पेंशन पाते थे, जिनकी संख्या सितंबर 2026 तक बढ़कर लगभग 82 लाख हो गई है। इसका मतलब है कि 31 लाख से ज़्यादा नए पेंशनभोगी इस प्रणाली से जुड़े हैं।

कर्मचारियों के लिए अपने प्रोविडेंट फंड (PF) की बचत का इस्तेमाल ज़रूरत पड़ने पर आसान बनाने के लिए नियमों को भी सरल किया गया है। आंशिक निकासी से जुड़े 13 प्रावधानों को अब तीन श्रेणियों में बांटा गया है: आवश्यक ज़रूरतें (बीमारी, शिक्षा, शादी), आवास की ज़रूरतें और विशेष परिस्थितियाँ। सदस्य अब शिक्षा के लिए 10 बार और शादी के खर्च के लिए 5 बार तक अपने पीएफ से पैसे निकाल सकते हैं।

सामाजिक सहायता का नया स्वरूप

इसके अलावा, बुजुर्गों, विधवाओं, दिव्यांगजनों और शोक संतप्त परिवारों की मदद के लिए 'प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना' शुरू की गई है। यह योजना अक्टूबर 2026 में मौजूदा राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) को संशोधित करके बनाई गई है और 2026-27 से 2030-31 तक जारी रहेगी।

इनपुट: IANS

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