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भारतीय सेवा क्षेत्र में ज़ोरदार तेज़ी, अक्टूबर में 4 महीने की सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ी गतिविधियाँ

अक्टूबर महीने में भारत के सेवा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी मज़बूती दिखाई है। मज़बूत घरेलू माँग के दम पर कारोबारी गतिविधियों ने पिछले चार महीनों में सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ी। समाचार एजेंसी IANS के…

भारतीय सेवा क्षेत्र में ज़ोरदार तेज़ी, अक्टूबर में 4 महीने की सबसे तेज़ रफ़्तार से बढ़ी गतिविधियाँ
(फोटो: IANS)

अक्टूबर महीने में भारत के सेवा क्षेत्र ने एक बार फिर अपनी मज़बूती दिखाई है। मज़बूत घरेलू माँग के दम पर कारोबारी गतिविधियों ने पिछले चार महीनों में सबसे तेज़ रफ़्तार पकड़ी। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जो त्योहारी मौसम के दौरान बढ़ी हुई मांग को दर्शाता है।

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HSBC के ताज़ा पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) के आँकड़ों से यह जानकारी सामने आई है। सेवा क्षेत्र का PMI सितंबर के 55.2 से बढ़कर अक्टूबर में 55.8 पर पहुँच गया। PMI एक अहम आर्थिक संकेतक है; इसमें 50 से ऊपर का आँकड़ा कारोबारी गतिविधियों में विस्तार यानी तेज़ी को दर्शाता है। अक्टूबर का आँकड़ा न केवल 50 के स्तर से काफ़ी ऊपर है, बल्कि यह अपने दीर्घकालिक औसत से भी बेहतर है।

महंगाई से मिली कुछ राहत

कीमतों के मोर्चे पर भी अच्छी ख़बर है। रिपोर्ट के मुताबिक, कंपनियों के लिए इनपुट लागत यानी कच्चे माल और अन्य ख़र्चों पर महंगाई अगस्त 2020 के बाद अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई। इसका असर ग्राहकों पर भी दिखा, जहाँ सेवा प्रदाताओं द्वारा वसूले जाने वाले शुल्कों में वृद्धि की रफ़्तार जून के बाद सबसे धीमी रही। HSBC की मुख्य भारतीय अर्थशास्त्री प्रांजुल भंडारी ने बताया कि इनपुट और आउटपुट दोनों कीमतों में बढ़ोतरी तो जारी रही, लेकिन सितंबर की तुलना में इसकी गति धीमी थी, जिससे महंगाई के दबाव में कुछ नरमी के संकेत मिलते हैं।

घरेलू बाज़ार बना ग्रोथ का इंजन

इस तेज़ी का मुख्य स्रोत घरेलू बाज़ार रहा। भारतीय उपभोक्ताओं और व्यवसायों की ओर से मिली मांग ने सेवा क्षेत्र के विस्तार में सबसे बड़ा योगदान दिया। हालाँकि, विदेशी यानी निर्यात ऑर्डर में वृद्धि की रफ़्तार फरवरी 2023 के बाद सबसे धीमी रही। सर्वे के अनुसार, वित्त और बीमा क्षेत्र ने इस दौरान सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। वहीं, सेवा और विनिर्माण दोनों क्षेत्रों को मिलाकर तैयार होने वाला समग्र PMI (कंपोजिट PMI) भी अक्टूबर में बढ़कर 56.2 हो गया, जो कुल आर्थिक उत्पादन में चार महीने की सबसे तेज़ बढ़ोतरी दिखाता है।

भविष्य को लेकर भी कंपनियाँ आशावादी हैं और उन्हें अगले 12 महीनों में कारोबार और बढ़ने की उम्मीद है। हालाँकि, अक्टूबर में रोज़गार वृद्धि की गति थोड़ी धीमी पड़ी, क्योंकि कंपनियाँ अपने पुराने लंबित कार्यों को पूरा करने में सफल रहीं।

इनपुट: IANS

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