दालों में आत्मनिर्भरता की ओर भारत का बड़ा कदम, उत्पादन बढ़ा और आयात में भारी कमी
भारत के ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ ने अपने पहले ही साल में असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसके चलते देश में दालों का उत्पादन बढ़ा है और विदेशी आयात पर निर्भरता में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। समाचार…
भारत के ‘दालों में आत्मनिर्भरता मिशन’ ने अपने पहले ही साल में असर दिखाना शुरू कर दिया है, जिसके चलते देश में दालों का उत्पादन बढ़ा है और विदेशी आयात पर निर्भरता में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार द्वारा जारी आंकड़ों से पता चलता है कि देश दाल उत्पादन के मामले में एक मजबूत स्थिति की ओर बढ़ रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का कुल दाल उत्पादन 274.09 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष (2024-25) के 256.83 लाख टन से काफी अधिक है। उत्पादन में इस उछाल का सीधा असर आयात पर पड़ा है। दालों के आयात मूल्य में 31.52% की भारी कमी आई है, जो 46,427.60 करोड़ रुपये से घटकर 31,793.59 करोड़ रुपये रह गया है।
खेती का बढ़ा रकबा और उत्पादकता
दालों की पैदावार में यह वृद्धि खेती के क्षेत्र और उत्पादकता, दोनों में सुधार के कारण संभव हुई है। 11 अक्टूबर 2025 को शुरू की गई इस सरकारी योजना के तहत दालों की खेती का रकबा 277.20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 286.46 लाख हेक्टेयर हो गया है। इसके साथ ही प्रति हेक्टेयर उपज भी 926 किलोग्राम से बढ़कर 957 किलोग्राम हो गई है।
निर्यात में उछाल और भविष्य का लक्ष्य
एक तरफ जहां आयात घटा है, वहीं दूसरी ओर भारतीय दालों की विदेशी बाजारों में मांग बढ़ी है। दालों का निर्यात 13.4% बढ़कर 969.53 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया, जो पहले 855 मिलियन डॉलर था। 2025-26 में कुल 10.01 लाख टन दालों का निर्यात किया गया, जिसमें चीन, यूएई, बांग्लादेश, अमेरिका और श्रीलंका प्रमुख खरीदार रहे।
11,440 करोड़ रुपये के बजट वाले इस मिशन का लक्ष्य और भी बड़ा है। सरकार ने 2030-31 तक दाल उत्पादन को लगभग 350 लाख टन और उत्पादकता को 1,130 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर तक ले जाने का लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को पाने के लिए किसानों को उन्नत और जलवायु-अनुकूल बीज मुहैया कराए जा रहे हैं और एनसीसीएफ (NCCF) व नेफेड (NAFED) के माध्यम से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद सुनिश्चित की जा रही है।
यह योजना देश के 489 जिलों में क्लस्टर-आधारित मॉडल पर लागू की जा रही है, जिसमें मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश जैसे राज्य प्रमुख दाल उत्पादक हैं। गौरतलब है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा दाल उत्पादक है और दालें प्रोटीन का एक अहम स्रोत हैं, जो देश की पोषण सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण हैं।
इनपुट: IANS



