सोमवार, 28 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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IPO बाज़ार में बहार: ₹3.86 लाख करोड़ की विशाल पाइपलाइन भारतीय अर्थव्यवस्था के भरोसे का प्रतीक

भारतीय शेयर बाज़ार का प्राइमरी मार्केट यानी IPO (Initial Public Offering) के ज़रिए पूंजी जुटाने का क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। यह अब केवल कभी-कभार आने वाले बड़े पब्लिक इश्यू तक सीमित नहीं…

IPO बाज़ार में बहार: ₹3.86 लाख करोड़ की विशाल पाइपलाइन भारतीय अर्थव्यवस्था के भरोसे का प्रतीक
(फोटो: IANS)

भारतीय शेयर बाज़ार का प्राइमरी मार्केट यानी IPO (Initial Public Offering) के ज़रिए पूंजी जुटाने का क्षेत्र एक नए दौर में प्रवेश कर रहा है। यह अब केवल कभी-कभार आने वाले बड़े पब्लिक इश्यू तक सीमित नहीं रहा, बल्कि अर्थव्यवस्था के लिए पूंजी निर्माण का एक स्थायी और मज़बूत ज़रिया बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय देश में मेनबोर्ड IPO की पाइपलाइन लगभग 3.86 लाख करोड़ रुपए की है, जो इस बात का संकेत है कि कंपनियाँ अपने विस्तार के लिए जनता से पैसा जुटाने में गहरा भरोसा जता रही हैं।

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यह पाइपलाइन कितनी बड़ी है, इसका अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि यह रकम इस साल अब तक 84 मेनबोर्ड IPO से जुटाए गए 1.10 लाख करोड़ रुपए से लगभग साढ़े तीन गुना ज़्यादा है। एसोसिएशन ऑफ इन्वेस्टमेंट बैंकर्स ऑफ इंडिया (AIBI) के अनुसार, इस पाइपलाइन में करीब 205 कंपनियाँ कतार में हैं। इनमें से 130 को बाज़ार नियामक SEBI से मंज़ूरी मिल चुकी है, जबकि 75 अन्य ने अपने दस्तावेज़ (DRHP) जमा कर दिए हैं और मंज़ूरी का इंतज़ार कर रही हैं।

निवेशकों का बढ़ता विश्वास

AIBI के चेयरमैन महावीर लुनावत ने बताया कि प्राइमरी मार्केट की यह सफलता केवल कंपनियों की तरफ़ से नहीं है, बल्कि निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है। उनके मुताबिक, संस्थागत निवेशकों (QIBs), अमीर निवेशकों (HNIs) और आम यानी खुदरा निवेशकों की बढ़ती भागीदारी दर्शाती है कि IPO मार्केट अब ज़्यादा व्यापक और दीर्घकालिक हो गया है।

दस साल का सफ़र और घरेलू पूंजी की ताक़त

आंकड़े बताते हैं कि 2016 से 2026 के बीच मेनबोर्ड IPO के ज़रिए कुल 8.36 लाख करोड़ रुपए जुटाए गए। जहाँ 2016 में सिर्फ़ 26 IPO से 26,494 करोड़ रुपए आए थे, वहीं 2025 में 103 IPO से यह आंकड़ा 1.76 लाख करोड़ रुपए तक पहुँच गया। इस साल भी अब तक 84 कंपनियाँ IPO ला चुकी हैं। लुनावत ने इस बदलाव का श्रेय घरेलू निवेश की बढ़ती ताक़त को दिया है। उन्होंने कहा, "भारतीय पूंजी बाज़ार में सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव यह है कि अब इसकी मज़बूती का आधार केवल विदेशी पूंजी नहीं, बल्कि घरेलू निवेश भी बन रहा है।"

SME सेक्टर और मर्चेंट बैंकर भी आगे

सिर्फ़ बड़ी कंपनियाँ ही नहीं, छोटे और मझोले उद्यम (SMEs) का IPO इकोसिस्टम भी तेज़ी से बढ़ा है। साल 2025 में रिकॉर्ड 267 SME IPO आए, जबकि 2026 में अब तक 156 इश्यू आ चुके हैं। 2016 से अब तक SME कंपनियों ने IPO से कुल 39,849 करोड़ रुपए जुटाए हैं। इस बाज़ार की बढ़ती गतिविधियों का असर निवेश बैंकिंग क्षेत्र पर भी पड़ा है। पिछले दस सालों में पंजीकृत मर्चेंट बैंकरों की संख्या 188 से बढ़कर 250 हो गई है, जो लगभग 33% की वृद्धि है। AIBI का मानना है कि अब बाज़ार की सफलता सिर्फ़ IPO की संख्या से नहीं, बल्कि कंपनियों की गुणवत्ता और पारदर्शिता से तय होगी।

इनपुट: IANS

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