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मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर की दमदार ग्रोथ, सितंबर में औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा

भारत के औद्योगिक उत्पादन में इस साल सितंबर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना…

मैन्युफैक्चरिंग और बिजली सेक्टर की दमदार ग्रोथ, सितंबर में औद्योगिक उत्पादन 6.7% बढ़ा
(फोटो: IANS)

भारत के औद्योगिक उत्पादन में इस साल सितंबर में मजबूत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में 6.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, यह बढ़ोतरी विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग) और बिजली उत्पादन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शानदार प्रदर्शन के कारण हुई है। हालांकि, यह वृद्धि अगस्त 2026 में दर्ज 8 प्रतिशत की दर से थोड़ी कम रही।

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सितंबर 2025 में आईआईपी का स्तर 116.5 था, जो इस साल सितंबर 2026 में बढ़कर 124.3 पर पहुँच गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी भारतीय औद्योगिक गतिविधियाँ मजबूत बनी हुई हैं।

किन क्षेत्रों का प्रदर्शन रहा सबसे अच्छा?

औद्योगिक उत्पादन की इस बढ़त में मैन्युफैक्चरिंग और बिजली क्षेत्र का सबसे बड़ा योगदान रहा। आंकड़ों के अनुसार, विनिर्माण क्षेत्र में 7.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई, जबकि बिजली एवं गैस आपूर्ति क्षेत्र ने 11.2 प्रतिशत की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की।

मैन्युफैक्चरिंग के भीतर 23 में से 17 उद्योग समूहों ने सकारात्मक वृद्धि दिखाई। इनमें इलेक्ट्रिकल उपकरण बनाने वाले उद्योग ने सबसे शानदार 33.9 प्रतिशत की छलांग लगाई। इसके बाद रबर एवं प्लास्टिक उत्पाद क्षेत्र (19.9% वृद्धि) और मोटर वाहन, ट्रेलर एवं सेमी-ट्रेलर निर्माण क्षेत्र (19% वृद्धि) का स्थान रहा।

निवेश और मांग में मजबूती के संकेत

आंकड़ों का उपयोग-आधारित वर्गीकरण यह बताता है कि अर्थव्यवस्था के किन हिस्सों में मांग बढ़ रही है। सितंबर में औद्योगिक उत्पादन की वृद्धि में इंटरमीडिएट गुड्स, प्राइमरी गुड्स और कैपिटल गुड्स का सबसे बड़ा योगदान रहा। इसे आमतौर पर निवेश और उत्पादन गतिविधियों में मजबूती का संकेत माना जाता है।

इसके अलावा, सांख्यिकी मंत्रालय ने सूचकांक की गणना के तरीके में एक अहम बदलाव की भी घोषणा की है। अब थोक मूल्य सूचकांक (WPI) की जगह कुछ उत्पाद समूहों के लिए आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) का इस्तेमाल किया जाएगा, जिसका असर आईआईपी बास्केट के करीब 36 प्रतिशत हिस्से पर पड़ेगा।

इनपुट: IANS

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