हरियाणा के किसानों की उपज अब कनाडा के बाज़ारों में, फ्रोज़न फूड्स की पहली खेप रवाना
भारत के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय बाज़ार खुला है, जिसकी शुरुआत हरियाणा के किसानों से हुई है। राज्य के सोनीपत से कनाडा के लिए 24 मीट्रिक टन फ्रोज़न फूड उत्पादों की एक खेप…
भारत के प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय बाज़ार खुला है, जिसकी शुरुआत हरियाणा के किसानों से हुई है। राज्य के सोनीपत से कनाडा के लिए 24 मीट्रिक टन फ्रोज़न फूड उत्पादों की एक खेप भेजी गई है, जिससे स्थानीय किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को वैश्विक बाज़ार से सीधे जुड़ने का अवसर मिला है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम किसानों की आय बढ़ाने और उनकी पहुँच अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।
वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी साझा की। मंत्रालय के मुताबिक, यह खेप 1 अक्टूबर 2026 को रवाना की गई थी। ‘अटेर्ना फूड्स प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड’ नामक एक किसान उत्पादक संगठन द्वारा निर्यात किए गए इन उत्पादों का कुल मूल्य 35,140 कनाडाई डॉलर है। इस खेप में कुल 2,295 डिब्बे शामिल हैं।
निर्यात में क्या-क्या शामिल?
कनाडा भेजी गई इस खेप में कई तरह के लोकप्रिय फ्रोज़न फूड आइटम हैं। इनमें हरे मटर, मिक्स सब्जियाँ, मटर-गाजर का मिश्रण, स्वीट कॉर्न और समोसे जैसी चीज़ें शामिल हैं। यह विविधता भारतीय प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों की अंतरराष्ट्रीय मांग को दर्शाती है। इस पूरी प्रक्रिया को सफल बनाने में कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने अहम भूमिका निभाई है। एपीडा ने न केवल इस निर्यातक इकाई को अपनी वित्तीय सहायता योजना के तहत मदद की, बल्कि किसानों के समूहों को वैश्विक बाज़ारों से जोड़ने में भी सहयोग कर रहा है।
किसानों को कैसे मिलेगा फ़ायदा?
यह निर्यात इस बात का प्रमाण है कि किसान उत्पादक संगठन (FPO) अब सिर्फ खेती तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे एक निर्यात-केंद्रित मूल्य श्रृंखला (Export-focused Value Chain) बनाने में भी सक्षम हो रहे हैं। एपीडा जैसी संस्थाएँ FPO और निर्यातकों के बीच एक मज़बूत कड़ी स्थापित कर रही हैं, जिससे किसानों के लिए बाज़ार तक पहुँच आसान हो जाती है। इस मॉडल के ज़रिए खेती के उत्पादों को सीधे प्रसंस्करण और अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जोड़ा जाता है, जिससे उत्पादकों को बेहतर मुनाफ़ा मिलता है और निर्यात में उनकी भूमिका भी मज़बूत होती है।
इनपुट: IANS



