रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारत की नई स्टील नीति का मसौदा जारी, 2047 तक उत्पादन क्षमता तीन गुना करने का लक्ष्य

भारत को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील उत्पादक और उपभोक्ता के तौर पर स्थापित करने वाली नई राष्ट्रीय स्टील नीति-2047 का मसौदा सरकार ने जारी कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस…

भारत की नई स्टील नीति का मसौदा जारी, 2047 तक उत्पादन क्षमता तीन गुना करने का लक्ष्य
(फोटो: IANS)

भारत को दुनिया के दूसरे सबसे बड़े स्टील उत्पादक और उपभोक्ता के तौर पर स्थापित करने वाली नई राष्ट्रीय स्टील नीति-2047 का मसौदा सरकार ने जारी कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, इस महत्वाकांक्षी योजना का उद्देश्य अगले दो दशकों में देश की कच्चे स्टील (क्रूड स्टील) उत्पादन क्षमता को लगभग तीन गुना बढ़ाना है। सरकार ने 2047 तक इस क्षमता को मौजूदा 220 मिलियन टन से बढ़ाकर 604 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है।

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इस नीति का एक बड़ा फोकस स्टील उद्योग को पर्यावरण के अनुकूल बनाना भी है। भारत ने 2070 तक 'नेट ज़ीरो' उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है, और इसी के तहत स्टील क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन को मौजूदा 2.54 टन प्रति टन क्रूड स्टील से घटाकर 1.54 टन करने की योजना है। इसके लिए नवीकरणीय ऊर्जा, स्क्रैप आधारित उत्पादन और हाइड्रोजन जैसी नई तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया जाएगा।

कच्चे माल की आपूर्ति और लागत पर ज़ोर

स्टील बनाने की कुल लागत में 65 से 70 प्रतिशत हिस्सा लौह अयस्क (Iron Ore) और कोकिंग कोल का होता है। मसौदा नीति में इन दोनों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। अनुमान है कि 2047 तक लौह अयस्क की मांग बढ़कर 772 मिलियन टन और कोकिंग कोल की मांग 236 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी।

लौह अयस्क के मामले में भारत काफी हद तक आत्मनिर्भर है, लेकिन भविष्य की ज़रूरतों को देखते हुए घरेलू आपूर्ति और परिवहन को मजबूत करने का प्रस्ताव है। इसके लिए स्लरी पाइपलाइन नेटवर्क का विस्तार किया जाएगा। वहीं, भारत अपनी 92% कोकिंग कोल की ज़रूरत आयात से पूरी करता है, इसलिए नीति में घरेलू खनन बढ़ाने और दीर्घकालिक अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति समझौते करने पर बल दिया गया है।

भविष्य की मांग और निर्यात का लक्ष्य

नीति में अनुमान लगाया गया है कि 2047 तक देश में तैयार स्टील (Finished Steel) की मांग बढ़कर 505 मिलियन टन हो जाएगी। इसके साथ ही, प्रति व्यक्ति स्टील की खपत भी बढ़कर 302 किलोग्राम तक पहुंचने की उम्मीद है। उत्पादन क्षमता में इस भारी वृद्धि से भारत के स्टील निर्यात को भी बड़ा impulso मिलेगा, जिसके 45 मिलियन टन तक पहुंचने की संभावना है।

गुणवत्ता, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग

इस ड्राफ्ट पॉलिसी में सिर्फ उत्पादन बढ़ाने पर ही नहीं, बल्कि मूल्यवर्धित उत्पादों (Value-Added Products) जैसे स्टेनलेस स्टील और स्पेशियलिटी स्टील पर भी ध्यान केंद्रित किया गया है, ताकि आयात पर निर्भरता कम हो सके। इसके अलावा, स्टील की गुणवत्ता सुधारने के लिए भारतीय मानकों को मजबूत करने और इंडस्ट्री 4.0, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन जैसी डिजिटल तकनीकों को अपनाने की भी योजना है। सरकार का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तकनीकी सहयोग और व्यापार बढ़ाने में अंतरराष्ट्रीय साझेदारी एक अहम भूमिका निभाएगी।

इनपुट: IANS

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