भारत में कोयले का उत्पादन बढ़ा, आयात पर निर्भरता घटी: जानें अक्टूबर के आंकड़े
भारत के कोयला क्षेत्र ने उत्पादन में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिससे आयातित कोयले पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। कोयला मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में कैप्टिव और…
भारत के कोयला क्षेत्र ने उत्पादन में एक बड़ी छलांग लगाई है, जिससे आयातित कोयले पर देश की निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है। कोयला मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, इस साल अक्टूबर में कैप्टिव और कमर्शियल खदानों से कोयले का उत्पादन 42 प्रतिशत बढ़कर 22.03 मिलियन टन (MT) तक पहुंच गया। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट बताती है कि पिछले साल इसी महीने यह आंकड़ा 15.49 मिलियन टन था।
उत्पादन में इस बढ़ोतरी का सीधा असर कोयले की आपूर्ति पर भी दिखा है। अक्टूबर महीने में कोयले की सप्लाई 36 प्रतिशत बढ़कर 21.11 मिलियन टन हो गई, जबकि पिछले वर्ष यह 15.48 मिलियन टन थी। ये आंकड़े देश में खनन गतिविधियों में आई लगातार तेजी को दर्शाते हैं।
उत्पादन में जारी है तेजी
अगर पूरे वित्त वर्ष के अब तक के आंकड़ों को देखें तो भी यह वृद्धि साफ नज़र आती है। अप्रैल से अक्टूबर 2026 की अवधि में कुल कोयला उत्पादन 117.23 मिलियन टन रहा, जो पिछले साल की इसी अवधि के 105.33 मिलियन टन के मुकाबले 11.30 प्रतिशत अधिक है। इसी तरह, कोयले की कुल आपूर्ति भी 111.95 मिलियन टन से बढ़कर 124.86 मिलियन टन हो गई है।
आयात में गिरावट और आत्मनिर्भरता
घरेलू उत्पादन बढ़ने का एक महत्वपूर्ण नतीजा कोयले के आयात में कमी के रूप में सामने आया है। अगस्त 2026 में भारत का कोयला आयात 5.83 प्रतिशत घटकर 104.57 मिलियन टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी महीने यह 111.05 मिलियन टन था। इसका मतलब है कि देश ने 6.48 मिलियन टन कम कोयला आयात किया, जिससे बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत हुई। मंत्रालय के अनुसार, यह सरकार के 'आत्मनिर्भर भारत' विजन को मजबूत करता है।
इस क्षेत्र को और गति देते हुए, झारखंड की लोहारी कोयला खदान को भी अक्टूबर 2026 में खनन शुरू करने की अनुमति मिल गई है। कई वर्षों से मंजूरी का इंतजार कर रही इस खदान के चालू होने से देश में कैप्टिव और कमर्शियल कोयला खदानों की कुल संख्या बढ़कर 87 हो गई है। मंत्रालय ने कहा, "ये उत्साहजनक नतीजे बेहतर परिचालन दक्षता, खनन उत्पादकता में वृद्धि और खनन क्षमताओं के अधिक प्रभावी उपयोग को दर्शाते हैं।"
इनपुट: IANS



