बुधवार, 21 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश की बहार, Q3 में सौदों की कीमत 131% उछली

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए जबरदस्त रही, जिसमें निवेश सौदों की संख्या और उनकी कुल कीमत में भारी उछाल दर्ज किया गया। इस दौरान सेक्टर में कुल 33 सौदे हुए, जिनका मूल्य…

भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर में निवेश की बहार, Q3 में सौदों की कीमत 131% उछली
(फोटो: IANS)

वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही भारतीय ऑटोमोबाइल सेक्टर के लिए जबरदस्त रही, जिसमें निवेश सौदों की संख्या और उनकी कुल कीमत में भारी उछाल दर्ज किया गया। इस दौरान सेक्टर में कुल 33 सौदे हुए, जिनका मूल्य 1.7 अरब डॉलर आंका गया है। समाचार एजेंसी IANS को ग्रांट थॉर्नटन भारत की एक रिपोर्ट से यह जानकारी मिली है। यह उछाल विलय एवं अधिग्रहण (M&A), निजी इक्विटी निवेश और सार्वजनिक बाज़ार से दोबारा पूंजी जुटाने जैसी गतिविधियों में आई तेज़ी का नतीजा है।

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रिपोर्ट के मुताबिक, पिछली तिमाही के मुकाबले सौदों की संख्या में 65% और उनके कुल मूल्य में 131% की शानदार वृद्धि हुई है। पिछली तिमाही में 71.7 करोड़ डॉलर के सिर्फ 20 सौदे हुए थे। ये आंकड़े दिखाते हैं कि जब फंडिंग के मामले में निवेशक चुनिंदा कंपनियों पर ही दांव लगा रहे हैं, तब भी उनका मोबिलिटी और इलेक्ट्रिफिकेशन के भविष्य को लेकर भरोसा कायम है।

इलेक्ट्रिक वाहन बने निवेश का केंद्र

इस तिमाही में निवेश का सबसे बड़ा आकर्षण इलेक्ट्रिक वाहन (EV) इकोसिस्टम रहा। निवेशकों ने सिर्फ EV बनाने वाली कंपनियों में ही नहीं, बल्कि बैटरी तकनीक, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, मोबिलिटी प्लेटफॉर्म और ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी से जुड़ी कंपनियों में भी जमकर पूंजी लगाई। रिपोर्ट बताती है कि निवेशकों ने उन कंपनियों को प्राथमिकता दी, जिनका कारोबारी मॉडल बड़े पैमाने पर विस्तार करने में सक्षम है, जिनके पास अनूठी तकनीक है और जो भारत के बदलते मोबिलिटी इकोसिस्टम में मज़बूत पकड़ रखती हैं।

सौदों का विस्तृत विश्लेषण

कुल सौदों में से, विलय एवं अधिग्रहण (M&A) और प्राइवेट इक्विटी/वेंचर कैपिटल (PE/VC) के तहत 808 मिलियन डॉलर के 28 सौदे हुए। riêng M&A गतिविधियों की बात करें तो इस तिमाही में 389 मिलियन डॉलर के 12 सौदे हुए, जबकि पिछली तिमाही में यह आंकड़ा 138 मिलियन डॉलर के पांच सौदों का था। घरेलू सौदे इस सेक्टर की गतिविधियों के मुख्य आधार बने रहे, जिनकी कुल सौदों की संख्या में 75% और कुल मूल्य में 87% हिस्सेदारी रही।

इस रुझान पर ग्रांट थॉर्नटन भारत में ऑटोमोटिव एवं ईवी इंडस्ट्री के लीडर और पार्टनर, साकेत मेहरा ने कहा, "ऑटोमोबाइल सेक्टर निवेश के एक नए चक्र में प्रवेश कर रहा है, जो मोबिलिटी के क्षेत्र में हो रहे बदलावों से प्रेरित है। अब पूंजी केवल वाहन निर्माताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि बैटरी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी और मोबिलिटी प्लेटफॉर्म सहित पूरे इकोसिस्टम में तेजी से निवेश किया जा रहा है।" उन्होंने आगे कहा कि यह ट्रेंड दिखाता है कि निवेशक उन कंपनियों में पैसा लगा रहे हैं जो भारत में मोबिलिटी सेक्टर के विकास के लिए ज़रूरी बुनियादी ढांचा तैयार कर रही हैं।

इनपुट: IANS

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