अमेरिकी जनगणना में गैर-नागरिकों को बाहर करने का प्रस्ताव, 5 भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने किया विरोध
अमेरिका में जनगणना के नियमों में प्रस्तावित एक बदलाव पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इसके तहत कुछ गैर-अमेरिकी नागरिकों को उस गिनती से बाहर रखने की बात कही गई है, जिसके आधार पर कांग्रेस में…
अमेरिका में जनगणना के नियमों में प्रस्तावित एक बदलाव पर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। इसके तहत कुछ गैर-अमेरिकी नागरिकों को उस गिनती से बाहर रखने की बात कही गई है, जिसके आधार पर कांग्रेस में राज्यों की सीटें तय होती हैं। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, प्रमिला जयपाल और रो खन्ना समेत पांच भारतीय-अमेरिकी सांसदों ने 150 से ज़्यादा डेमोक्रेटिक सहयोगियों के साथ मिलकर प्रशासन से इस नियम को वापस लेने की मांग की है।
इन सांसदों का तर्क है कि यह प्रस्ताव अमेरिकी संविधान के 14वें संशोधन के खिलाफ है, जो कुल आबादी के आधार पर राज्यों को प्रतिनिधित्व देने की बात करता है। उन्होंने एक सार्वजनिक टिप्पणी पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें कहा गया है कि ऐसे बदलाव अल्पसंख्यक समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या है जनगणना का प्रस्तावित नियम?
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो द्वारा प्रस्तावित इस नियम के तहत, कांग्रेस में सीटों के बंटवारे के लिए होने वाली जनसंख्या गिनती में स्थायी निवासियों (ग्रीन कार्ड धारकों) को तो शामिल रखा जाएगा, लेकिन बिना दस्तावेज़ वाले प्रवासियों और अस्थायी वीज़ा पर रह रहे लोगों को बाहर कर दिया जाएगा। ब्यूरो का तर्क है कि अमेरिका में स्थायी निवास और देश के प्रति निष्ठा को इसका आधार बनाया जाना चाहिए। इसके अलावा, प्रस्ताव में जनगणना प्रश्नावली से नस्ल, जातीयता और सेक्सुअल ओरिएंटेशन जैसे सवालों को हटाने का भी सुझाव दिया गया है।
विरोध और समर्थन में तर्क
इस अभियान का नेतृत्व कर रहे वरिष्ठ डेमोक्रेट रॉबर्ट गार्सिया ने कहा है, "हम कांग्रेस और अदालतों में इस नियम का विरोध करेंगे।" एशियन पैसिफिक अमेरिकन कॉकस की अध्यक्ष ग्रेस मेंग ने चेतावनी दी है कि इससे असमानताओं की पहचान करने के लिए ज़रूरी आंकड़े भी कमज़ोर पड़ जाएंगे। सांसदों का मानना है कि जनसांख्यिकीय आंकड़ों पर प्रतिबंध से मतदान और नागरिक अधिकारों की सुरक्षा भी प्रभावित होगी।
दूसरी ओर, रिपब्लिकन सांसद मैरी मिलर ने इस प्रस्ताव का समर्थन करते हुए इसे और आगे बढ़ाने की मांग की है। उन्होंने कहा कि सभी गैर-अमेरिकी नागरिकों, यहाँ तक कि ग्रीन कार्ड धारकों को भी इस गिनती से बाहर रखा जाना चाहिए और प्रतिनिधित्व सिर्फ अमेरिकी नागरिकों के आधार पर तय हो।
राज्यों ने भी जताई चिंता
नेशनल कॉन्फ्रेंस ऑफ स्टेट लेजिस्लेचर्स ने भी इस प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की है। संगठन का कहना है कि जनगणना के आंकड़ों का इस्तेमाल चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं तय करने के लिए होता है और प्रस्तावित बदलाव इस प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि राज्यों को चुनावी नक्शे तैयार करने के लिए छोटे क्षेत्रों के आंकड़े जुटाने पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है, क्योंकि प्रशासनिक रिकॉर्ड जनगणना का विकल्प नहीं हो सकते।
इनपुट: IANS



