स्टारलिंक विवाद: राजीव चंद्रशेखर बोले- राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि, किसी कारोबारी के दबाव में नहीं बदलेगी नीति
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में हो रही देरी के विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) केरलम के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि…
एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक को भारत में मंजूरी मिलने में हो रही देरी के विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) केरलम के अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर ने सरकार का पक्ष स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि स्टारलिंक एक बेहतरीन इनोवेशन है, लेकिन भारत सरकार अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, संप्रभुता और लोगों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और किसी एक कारोबारी के दबाव में अपनी नीतियां नहीं बदल सकती।
समाचार एजेंसी IANS से इस मुद्दे पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार की नीति बनाने की प्रक्रिया किसी एक ट्वीट या पोस्ट से प्रभावित नहीं होती। उन्होंने जोर देकर कहा, "कोई एक कारोबारी सरकार पर अपने लक्ष्यों, उद्देश्यों, जरूरी कामों या प्राथमिकताओं को बदलने के लिए दबाव नहीं डाल सकता। भले ही एलन दुनिया के सबसे होनहार जीनियस और सबसे सफल भविष्यवादी कारोबारियों में से एक हैं और उनका स्टारलिंक निश्चित रूप से एक बेहतरीन कंपनी और हाल के समय का सबसे बड़ा मोबिलिटी इनोवेशन है, फिर भी भारत सरकार को वही करना होगा जो उसकी जिम्मेदारी है - यानी अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा, अपनी संप्रभुता और अपने लोगों की रक्षा करना।"
सुरक्षा मंजूरी की प्रक्रिया अहम
भारत में सैटेलाइट कम्युनिकेशन सेवाएं शुरू करने के लिए गृह मंत्रालय से सुरक्षा मंजूरी अनिवार्य है। फिलहाल स्टारलिंक समेत सभी आवेदक कंपनियां रेगुलेटरी प्रक्रिया के एक ही चरण में हैं और अपनी मंजूरी का इंतजार कर रही हैं। चंद्रशेखर ने मस्क के उन आरोपों को खारिज कर दिया कि मंजूरी में देरी के पीछे प्रतिस्पर्धात्मक हित हो सकते हैं। उन्होंने कहा, "यह बात बिल्कुल सच नहीं है।"
उन्होंने समझाया, "सैटेलाइट टेक्नोलॉजी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बिल्कुल अलग तरह की चुनौती पेश करती है। अभी जो सिक्योरिटी क्लीयरेंस की प्रक्रिया चल रही है, उसमें हर प्रोवाइडर और हर आवेदक की सुरक्षा और भरोसे से जुड़े मुद्दों की बारीकी से जांच की जाएगी। और सरकार यही कर रही है। मुझे लगता है कि इसके लिए सब्र की जरूरत है, जल्दबाजी की नहीं।"
तकनीक और वीजा पर भी रखी राय
चंद्रशेखर के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार टेक सेक्टर में 2021 में बनाए गए एक फ्रेमवर्क के सिद्धांतों पर काम करती है, जिसका मूलमंत्र है कि टेक्नोलॉजी सभी के लिए खुली और सुलभ हो।
उन्होंने अमेरिका में एच-1बी वीजा प्रक्रिया के कथित दुरुपयोग पर भी टिप्पणी की। खुद छह साल तक अमेरिका में काम कर चुके और इस प्रक्रिया के लाभार्थी रहे चंद्रशेखर ने कहा, "किसी के भी मन में, यहां तक कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के मन में भी, इस बात को लेकर कोई शक नहीं है कि टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अमेरिका की लीडरशिप को आगे बढ़ाने में भारतीय टैलेंट ने अहम भूमिका निभाई है।" हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि कुछ भारतीय और अमेरिकी कंपनियों द्वारा प्रक्रिया का गलत इस्तेमाल करने के कारण ही उन पर रोक लगाई जा रही है। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को भारतीय प्रतिभा की जरूरत है और भारतीय प्रतिभा भी अमेरिकी अवसरों की तलाश में रहती है।
इनपुट: IANS



