मंगलवार, 29 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
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भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पीयूष गोयल के अमेरिकी दौरे से जगीं नई उम्मीदें

भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका के दौरे पर हैं, जिसे इस समझौते को…

भारत-अमेरिका व्यापार समझौता: पीयूष गोयल के अमेरिकी दौरे से जगीं नई उम्मीदें
(फोटो: IANS)

भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत तेज हो गई है। इसी सिलसिले में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल अमेरिका के दौरे पर हैं, जिसे इस समझौते को अंतिम रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस यात्रा के दौरान गोयल की अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के साथ होने वाली बैठक पर सबकी नजरें टिकी हैं।

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गोयल 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को अमेरिका के विस्कॉन्सिन राज्य के मिल्वौकी शहर में हो रही जी20 व्यापार मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेंगे। यह बैठक अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि के निमंत्रण पर ही आयोजित की गई है। माना जा रहा है कि इस बैठक के अलावा दोनों देशों के बीच होने वाली सीधी बातचीत से व्यापार समझौते की राह में बड़ी प्रगति हो सकती है।

समझौते का ढाँचा और भारत की प्राथमिकताएँ

एक आधिकारिक बयान में बताया गया है कि दोनों देश 7 फरवरी 2026 को जारी संयुक्त बयान के आधार पर एक अंतरिम व्यापार समझौते पर भी काम कर रहे हैं। भारत की कोशिश है कि उसके निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में न सिर्फ आयात शुल्क में छूट मिले, बल्कि दूसरे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले एक स्पष्ट टैरिफ लाभ भी हासिल हो। इससे वैश्विक बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धा करने की क्षमता बढ़ेगी।

इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने भी संकेत दिया था कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की रूपरेखा लगभग तैयार है। उन्होंने बताया था कि दोनों देश एक ऐसे सिस्टम पर काम कर रहे हैं, जिसके तहत औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले ही एक-दूसरे को प्राथमिकता के आधार पर बाजार में पहुंच दी जा सके। अग्रवाल ने यह भी स्पष्ट किया था कि भारत ज़्यादातर 'मोस्ट फेवर्ड नेशन' (MFN) टैरिफ व्यवस्था के तहत काम करता है, जबकि अमेरिका फिलहाल कार्यकारी आदेशों से टैरिफ लागू कर रहा है। इसलिए, एक ऐसी साझा व्यवस्था बनानी होगी जिससे दोनों देशों की कंपनियों को विशेष बाजार पहुंच मिल सके।

व्यापार से आगे, निवेश पर भी नजर

पीयूष गोयल की यह यात्रा सिर्फ सरकारी बैठकों तक ही सीमित नहीं रहेगी। वह व्यापार और निवेश संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम द्विपक्षीय चर्चाओं में भी शामिल होंगे। इन चर्चाओं का मुख्य उद्देश्य भारत के किसानों, मछुआरों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और MSME (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम) जैसे वर्गों के लिए नए अवसर पैदा करना है।

इसके अलावा, वाणिज्य मंत्री मिल्वौकी और शिकागो में विनिर्माण, उपभोक्ता वस्तु, कृषि व्यवसाय, रिटेल और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों की बड़ी अमेरिकी कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। इन बैठकों में भारत में निवेश, उत्पादन बढ़ाने, तकनीकी सहयोग और सप्लाई चेन साझेदारी जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

जी20 में भारत का रुख

जी20 की बैठक में भारत विश्व व्यापार संगठन (WTO) पर आधारित एक खुली, पारदर्शी, न्यायसंगत और भेदभाव-रहित वैश्विक व्यापार प्रणाली का समर्थन करेगा। साथ ही, भारत विकासशील देशों को अपनी नीतियां बनाने के लिए पर्याप्त लचीलापन देने की जरूरत पर भी जोर देगा।

इनपुट: IANS

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