रविवार, 1 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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G20 बैठक में भारत की दो टूक: दुनिया को युद्ध नहीं, कूटनीति से समाधान की ज़रूरत

वैश्विक संघर्षों की बढ़ती तपिश के बीच भारत ने दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के समूह G20 से साफ शब्दों में कहा है कि समस्याओं का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा। विदेश…

G20 बैठक में भारत की दो टूक: दुनिया को युद्ध नहीं, कूटनीति से समाधान की ज़रूरत
(फोटो: IANS)

वैश्विक संघर्षों की बढ़ती तपिश के बीच भारत ने दुनिया के सबसे ताकतवर देशों के समूह G20 से साफ शब्दों में कहा है कि समस्याओं का हल सैन्य कार्रवाई से नहीं, बल्कि बातचीत और कूटनीति से ही निकलेगा। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के अटलांटा में G20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद बताया कि भारत ने विकासशील देशों (ग्लोबल साउथ) पर पड़ रहे युद्ध के गंभीर आर्थिक प्रभावों पर चिंता जताई है।

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समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शनिवार को संपन्न हुई इस बैठक में भारत ने खाद्य, ऊर्जा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयासों का आग्रह किया। एस. जयशंकर ने भारतीय पत्रकारों से बातचीत में कहा कि भारत अपने इन प्रयासों में अमेरिका के साथ तालमेल बनाकर चल रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले समूह किसी आम सहमति पर पहुंच जाएगा।

संघर्षों का वैश्विक असर और भारत की भूमिका

जयशंकर ने बताया कि अटलांटा की बैठक में भू-राजनीतिक हालात पर गंभीर चर्चा हुई, जिसमें दो बड़े संघर्षों के वैश्विक प्रभाव पर विचार किया गया। भारत का संदेश स्पष्ट था कि संघर्षों की कीमत सिर्फ सीधे तौर पर शामिल देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया, खासकर 'ग्लोबल साउथ' चुका रहा है। विदेश मंत्री ने कहा, "भारत स्वयं इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभा रहा है, और बैठक में दूसरे देशों के विदेश मंत्रियों ने भी भारत के प्रयासों का उल्लेख किया।" भारत का मानना है कि लंबे समय तक चलने वाले युद्धों को समाप्त करने की दिशा में प्रयास होने चाहिए।

खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर भारत की चिंता

रूस-यूक्रेन संघर्ष के संदर्भ में भारत की मध्यस्थता की कोशिशों का ब्योरा देते हुए जयशंकर ने बताया कि भारत तीन प्रमुख मुद्दों पर संबंधित पक्षों से बात कर रहा है। इनमें रूस और यूक्रेन से अनाज का निर्यात फिर शुरू करना, नागरिक जहाजों और नाविकों की सुरक्षा, तथा ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमलों को रोकना शामिल है।

उन्होंने कहा कि काला सागर से अनाज की आवाजाही में भारी गिरावट आई है, जिसका सीधा असर खाद्य ज़रूरतों के लिए आयात पर निर्भर देशों पर पड़ रहा है। जयशंकर के मुताबिक, ग्लोबल साउथ की चिंता अधिक है क्योंकि वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनाज के बड़े खरीदार हैं। इसके अलावा, उर्वरकों की उपलब्धता का मुद्दा भी उठा, जिसका संबंध काला सागर के साथ-साथ खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र से भी है। ऊर्जा सुरक्षा पर भारत ने ऊर्जा आपूर्ति को राजनीतिक हथियार बनाने की प्रवृत्ति पर गहरी चिंता जताई।

आपूर्ति श्रृंखलाओं को मज़बूत करने पर ज़ोर

बैठक के दौरान वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं के मुद्दे पर भारत ने किसी एक देश या क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता कम करने की वकालत की। एस. जयशंकर ने कोविड महामारी का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्पादन के केंद्रों को अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों में विकसित करना ज़रूरी है। उन्होंने आगाह किया कि आपूर्ति श्रृंखलाओं को राजनीतिक दबाव बनाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की प्रवृत्ति से बचना होगा।

जी-20 बैठक में कोई सर्वसम्मत बयान जारी न होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि दिसंबर में होने वाले शिखर सम्मेलन से पहले साझा सहमति बनाने के प्रयास तेज होने की उम्मीद है।

इनपुट: IANS

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News4Social इंटरनेशनल डेस्क

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