शंघाई भी आर्थिक सुस्ती की चपेट में, चीन की सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव
चीन की आर्थिक महाशक्ति और सबसे समृद्ध शहर माने जाने वाले शंघाई पर भी अब देश में जारी मंदी का साया गहराता जा रहा है। शहर के हालिया वित्तीय आंकड़े और कारोबारी माहौल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक…
चीन की आर्थिक महाशक्ति और सबसे समृद्ध शहर माने जाने वाले शंघाई पर भी अब देश में जारी मंदी का साया गहराता जा रहा है। शहर के हालिया वित्तीय आंकड़े और कारोबारी माहौल इस बात का संकेत दे रहे हैं कि आर्थिक सुस्ती अब सिर्फ़ चीन के कम विकसित इलाकों तक ही सीमित नहीं रही। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस घटनाक्रम ने चीन की व्यापक आर्थिक चुनौतियों को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
जीडीपी के लिहाज़ से देश की सबसे बड़ी शहरी अर्थव्यवस्था होने के नाते शंघाई हमेशा से चीन के सबसे मज़बूत राजस्व वाले क्षेत्रों में से एक रहा है। यह शहर निवेश, व्यापार, उपभोग और वित्तीय गतिविधियों का प्रमुख केंद्र भी है। लेकिन अब यहां के शॉपिंग मॉल, रेस्तरां और दफ्तरों में भीड़ और कारोबारी गतिविधियां कमज़ोर पड़ रही हैं, जो उपभोक्ता खर्च में आई नरमी को दिखाता है।
क्यों बिगड़ रहे हैं शंघाई के हालात?
रिपोर्ट के अनुसार, शहर की आर्थिक मुश्किलें कई वजहों का मिला-जुला परिणाम हैं। इनमें कोविड-19 लॉकडाउन का लंबा असर, रियल एस्टेट बाज़ार की लगातार कमजोरी, विदेशी कंपनियों और ज़्यादा वेतन वाले कर्मचारियों का शहर छोड़ना, और कमज़ोर उपभोक्ता खर्च जैसे कारक प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन सभी का असर स्थानीय सरकारों की वित्तीय सेहत पर भी पड़ रहा है।
राजस्व से ज़्यादा खर्च
चीन के वित्त मंत्रालय ने जुलाई के अंत में बताया था कि 2023 की पहली छमाही में देश के 31 प्रांतों में से कोई भी अपनी आय से अपने खर्चों को पूरी तरह से वहन करने के लिए पर्याप्त राजस्व नहीं जुटा सका। स्थानीय सरकारों की राजकोषीय आत्मनिर्भरता दर औसतन केवल 56.3 प्रतिशत रही।
चिंता की बात यह है कि मज़बूत आर्थिक आधार के बावजूद शंघाई भी अब अपने राजस्व स्रोतों से ज़्यादा खर्च कर रहा है। रियल एस्टेट से मिलने वाला राजस्व घट रहा है, कंपनियों का मुनाफा दबाव में है और इसका सीधा असर टैक्स संग्रह पर पड़ रहा है। 'द डॉन' की रिपोर्ट में कहा गया है कि शंघाई का वित्तीय दबाव चीन की अर्थव्यवस्था की बड़ी तस्वीर की ओर इशारा करता है, जो सुस्त कारोबारी माहौल और घरेलू मांग में कमी के प्रभावों को दर्शाता है।
इनपुट: IANS



