भारत-न्यूज़ीलैंड व्यापार समझौता लागू: भारतीय निर्यातकों और छोटे कारोबारों के लिए खुले नए रास्ते
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू हो गया है, जिसे देश के उद्योग जगत ने एक बड़ा कदम बताया है। उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक, यह समझौता न केवल विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक…
भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौता (FTA) लागू हो गया है, जिसे देश के उद्योग जगत ने एक बड़ा कदम बताया है। उद्योग संगठन एसोचैम के मुताबिक, यह समझौता न केवल विकसित देशों के साथ भारत की आर्थिक साझेदारी को मज़बूत करेगा, बल्कि भारतीय निर्यातकों, निर्माताओं और छोटे कारोबारों के लिए अवसरों के नए दरवाज़े भी खोलेगा। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस समझौते से कई प्रमुख भारतीय उद्योगों को न्यूज़ीलैंड के बाज़ार में शुल्क-मुक्त (duty-free) पहुंच मिलेगी, जिसका सीधा लाभ अर्थव्यवस्था को होगा।
एसोचैम के अध्यक्ष निर्मल के. मिंडा ने इस समझौते को दोनों देशों के लिए एक लाभकारी साझेदारी करार दिया है। उन्होंने कहा, "इस समझौते की वास्तविक सफलता उन अवसरों से मापी जाएगी, जो यह पैदा करेगा और दोनों देशों के लोगों के जीवन पर जो सकारात्मक प्रभाव डालेगा।"
समझौते से भारत को क्या मिलेगा?
इस व्यापारिक समझौते के तहत, न्यूज़ीलैंड ने भारत के 8,284 उत्पाद वर्गों (टैरिफ लाइन्स) पर तत्काल प्रभाव से शुल्क हटा दिया है। इससे दवा, कपड़ा, मशीनरी, इंजीनियरिंग उत्पाद, रत्न एवं आभूषण, और चमड़ा जैसे क्षेत्रों को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है। एसोचैम का मानना है कि न्यूज़ीलैंड के बाज़ार तक आसान पहुंच विशेष रूप से भारतीय सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs), कारीगरों, किसानों और महिला उद्यमियों के लिए फायदेमंद साबित होगी।
इसके अलावा, समझौते में भारतीय पेशेवरों की आवाजाही को आसान बनाने के प्रावधान भी शामिल हैं। इसके तहत हर साल 5,000 अस्थायी रोजगार वीजा और 1,000 वर्किंग हॉलिडे वीजा उपलब्ध कराए जाएंगे।
भारत ने क्या रियायतें दी हैं?
व्यापार संतुलन बनाए रखने के लिए भारत ने भी न्यूज़ीलैंड के कुछ उत्पादों पर आयात शुल्क हटाने पर सहमति जताई है। इनमें लकड़ी, ऊन और भेड़ के मांस जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिन पर शुल्क तत्काल समाप्त कर दिया गया है। वहीं, 35.6% टैरिफ लाइनों पर शुल्क अगले 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से खत्म किए जाएंगे। साथ ही, मनुका शहद और कीवी फल जैसे चुनिंदा उत्पादों के लिए कोटा-आधारित रियायतें भी दी गई हैं।
व्यापार के आंकड़े
एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत ने न्यूज़ीलैंड को 71.1 करोड़ डॉलर का निर्यात किया था, जबकि आयात 58.7 करोड़ डॉलर रहा था, जिससे 12.4 करोड़ डॉलर का व्यापार अधिशेष (trade surplus) हुआ। हालांकि, वित्त वर्ष 2025-26 में निर्यात घटकर 56.7 करोड़ डॉलर और आयात बढ़कर 58.9 करोड़ डॉलर हो गया, जिससे 2.2 करोड़ डॉलर का मामूली व्यापार घाटा हुआ। उद्योग जगत को उम्मीद है कि यह नया समझौता व्यापार संतुलन को भारत के पक्ष में लाने में मदद करेगा।
इस अवसर पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल द्वारा भारत से न्यूज़ीलैंड के लिए पहली जेसीबी मशीन के निर्यात को हरी झंडी दिखाए जाने का जिक्र करते हुए मिंडा ने इसे भारतीय विनिर्माण क्षेत्र की बढ़ती क्षमता का प्रतीक बताया।
इनपुट: IANS



