शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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स्मार्ट मीटर लक्ष्य 2028: रफ़्तार ढाई गुना बढ़ाने की ज़रूरत, रोज़ाना 2.5 लाख मीटर लगाने होंगे

भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के लक्ष्य को मार्च 2028 तक पूरा करने के लिए अब इंस्टॉलेशन की गति में ढाई गुना से भी ज़्यादा की तेज़ी लानी होगी। समाचार एजेंसी IANS की एक…

स्मार्ट मीटर लक्ष्य 2028: रफ़्तार ढाई गुना बढ़ाने की ज़रूरत, रोज़ाना 2.5 लाख मीटर लगाने होंगे
(फोटो: IANS)

भारत सरकार के महत्वाकांक्षी 25 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाने के लक्ष्य को मार्च 2028 तक पूरा करने के लिए अब इंस्टॉलेशन की गति में ढाई गुना से भी ज़्यादा की तेज़ी लानी होगी। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए देश को अब प्रतिदिन लगभग 2.5 लाख स्मार्ट मीटर लगाने की आवश्यकता है, जबकि पिछले वित्त वर्ष में यह औसत करीब 99,000 मीटर प्रतिदिन था।

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केयरएज रेटिंग्स द्वारा शुक्रवार को जारी इस विश्लेषण के मुताबिक, अप्रैल 2026 तक देश भर में करीब 6.5 करोड़ स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं, जो कुल लक्ष्य का लगभग एक-चौथाई हिस्सा है। हालाँकि पिछले कुछ वर्षों में स्मार्ट मीटर लगाने की रफ़्तार बढ़ी है, लेकिन शेष लक्ष्य को समय पर पूरा करने के लिए एक बड़ी छलाँग की ज़रूरत होगी।

राज्यों का प्रदर्शन और वित्तीय लाभ

स्मार्ट मीटर लगाने में राज्यों के बीच प्रदर्शन में काफ़ी अंतर देखने को मिला है। महाराष्ट्र लगभग 1.1 करोड़ मीटरों के साथ सबसे आगे है, जो देश के कुल इंस्टॉलेशन का करीब 17% है। महाराष्ट्र, बिहार और उत्तर प्रदेश मिलकर कुल लगाए गए मीटरों का लगभग 47% हिस्सा रखते हैं। रिपोर्ट बताती है कि बिहार ने अपनी स्वीकृत क्षमता का लगभग 52% हिस्सा पूरा कर लिया है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह आँकड़ा करीब 32% है, जो ज़मीनी स्तर पर क्रियान्वयन के अंतर को दर्शाता है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि स्मार्ट मीटरों का पूर्ण पैमाने पर उपयोग बिजली वितरण कंपनियों (डिस्कॉम) के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। इससे वित्त वर्ष 2030-31 तक लगभग 1.84 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न होने की उम्मीद है। यह लाभ बेहतर बिलिंग, वसूली दक्षता और बिजली की तकनीकी व वाणिज्यिक हानि (AT&C Loss) में कमी के ज़रिए संभव होगा।

सुधार और चुनौतियाँ

स्मार्ट मीटरिंग की वजह से बिजली वितरण क्षेत्र में सुधार के संकेत दिखने भी लगे हैं। AT&C घाटा वित्त वर्ष 2019-20 के 20.73% से घटकर वित्त वर्ष 2024-25 में 15.04% पर आ गया है। इस दौरान बिलिंग दक्षता 88% और वसूली दक्षता 97% तक पहुँच गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट मीटरों के व्यापक इस्तेमाल से बिलिंग दक्षता 97-98% और प्रीपेड मॉडल से वसूली 99% तक पहुँच सकती है, जिससे AT&C घाटा 12% तक कम हो सकता है।

हालांकि, एक बड़ी चुनौती प्रीपेड स्मार्ट मीटरों को अपनाने की धीमी गति है। अप्रैल 2026 तक लगे 6.5 करोड़ मीटरों में से केवल 9% ही प्रीपेड मोड में काम कर रहे थे। केयरएज रेटिंग्स के निदेशक रवलीन सेठी के अनुसार, "स्मार्ट मीटरिंग की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि डिस्कॉम इंस्टॉलेशन को परिचालन सुधार में कितनी प्रभावी तरह बदल पाती हैं।" इसके लिए सटीक रीडिंग को बिलिंग सिस्टम से जोड़ना और उपभोक्ताओं को उनकी खपत प्रबंधित करने के लिए साधन देना ज़रूरी है।

इनपुट: IANS

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