सेमीकंडक्टर और स्वच्छ ऊर्जा में नई ऊंचाइयां छुएगा भारत-जापान सहयोग, निर्मला सीतारमण ने की अहम बैठक
भारत और जापान अपने आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब दोनों देशों के बीच सहयोग स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) जैसे रणनीतिक…
भारत और जापान अपने आर्थिक संबंधों को और मज़बूत करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। अब दोनों देशों के बीच सहयोग स्वच्छ ऊर्जा, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों (critical minerals) जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में और बढ़ाया जाएगा। यह महत्वपूर्ण चर्चा केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और जापान बैंक फॉर इंटरनेशनल कोऑपरेशन (जेबीआईसी) के गवर्नर काजुहिको अमाकावा के बीच हुई एक बैठक में हुई।
समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, यह मुलाकात बैंकॉक में विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वार्षिक बैठकों के दौरान हुई। बैठक में दोनों पक्षों ने उन्नत विनिर्माण (advanced manufacturing), इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और एक मज़बूत सप्लाई चेन के निर्माण जैसे कई अहम मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।
निवेश और भविष्य की योजनाएं
इस बातचीत में 60 करोड़ डॉलर के भारत-जापान फंड का खास तौर पर उल्लेख किया गया। इसके अलावा, राष्ट्रीय निवेश एवं अवसंरचना कोष (NIIF) में जापान की भागीदारी पर भी चर्चा हुई। जेबीआईसी के गवर्नर अमाकावा ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और बायो-एथेनॉल के क्षेत्र में मौजूदा फंड की सफलता को सराहा और भविष्य में एक नए फंड की स्थापना की उम्मीद भी जताई।
गवर्नर अमाकावा ने बताया कि जापानी कंपनियों की दिलचस्पी भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में लगातार बढ़ रही है। उन्होंने राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम (NICDC) में जेबीआईसी की हिस्सेदारी का जिक्र करते हुए धोलेरा में मौजूद अवसरों पर विशेष रूप से जोर दिया। साथ ही, उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा सेंटर के क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को भी रेखांकित किया।
छोटे शहरों में निवेश का आग्रह
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस मौके पर संतुलित शहरी विकास के महत्व पर बल दिया। उन्होंने जापानी कंपनियों से आग्रह किया कि वे विशाखापत्तनम जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अपना निवेश बढ़ाएं। दोनों ही पक्षों ने यह माना कि भारत और जापान के बीच आर्थिक एवं वित्तीय सहयोग को और गहरा करने की अपार संभावनाएं हैं।
इससे पहले, वित्त मंत्री ने एक अन्य कार्यक्रम में भारत के महत्वाकांक्षी शहरी विकास कार्यक्रमों का ब्योरा दिया। उन्होंने अटलांटिक काउंसिल के साथ बातचीत में मध्यम आय वाले देशों के सामने आने वाले भुगतान संतुलन (Balance of Payments) संकट का मुद्दा भी उठाया और कहा कि ऐसे मामलों में समाधान मिलने में कई वर्षों की देरी नहीं होनी चाहिए।
इनपुट: IANS



