भारत-यूरोपियन संघ व्यापार समझौता: 17 साल की लंबी बातचीत के बाद बराबरी की शर्तों पर बनी सहमति
भारत और यूरोपियन संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर करीब 17 सालों से चल रही बातचीत आखिरकार एक सफल मुकाम पर पहुँच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इसे…
भारत और यूरोपियन संघ (ईयू) के बीच मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर करीब 17 सालों से चल रही बातचीत आखिरकार एक सफल मुकाम पर पहुँच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने इसे सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताते हुए कहा कि यह समझौता बराबरी की शर्तों पर संपन्न हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि भारत के औद्योगिक विकास के अगले चरण के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) बेहद महत्वपूर्ण साबित होंगे।
यह व्यापार समझौता, जिसकी बातचीत 2007 में शुरू हुई थी, कई वर्षों तक रुका रहा। 2022 में इसे फिर से गति मिली और इसी साल 27 जनवरी 2026 को वार्ता पूरी हुई। हाल ही में यूरोपीय आयोग ने इस समझौते को हस्ताक्षर और अंतिम मंजूरी के लिए यूरोपीय संघ परिषद के पास भेज दिया है, जो इस प्रक्रिया में एक अहम कदम है।
टेक्नोलॉजी और स्थानीय उत्पादन पर जोर
उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो (यूपीआईटीएस) में बोलते हुए जितिन प्रसाद ने कहा कि विदेशी निवेश को लेकर भारत का नजरिया अब बदल गया है। देश अब सिर्फ एक उपभोक्ता बाजार बने रहना नहीं चाहता। उन्होंने कहा, "भारत में अपने कारोबार का विस्तार करने वाली विदेशी कंपनियों को संयुक्त उपक्रमों (ज्वाइंट वेंचर्स) के माध्यम से स्थानीय उद्योगों के साथ साझेदारी करने और तकनीक हस्तांतरण को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।" इसका मकसद घरेलू विनिर्माण को मजबूत करना और भारतीय उद्योगों की प्रतिस्पर्धा क्षमता को बढ़ाना है।
AI और गुणवत्ता का महत्व
जितिन प्रसाद ने वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने कहा, "हमें गुणवत्ता सुनिश्चित करनी होगी और वैश्विक बाजार हमारे लिए तैयार बैठा है।" मंत्री ने यह भी बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSME) के लिए एक बड़ा बदलाव ला सकता है। AI उत्पादकता बढ़ाने, लागत घटाने और प्रतिस्पर्धा में आगे निकलने में मदद कर सकता है। उन्होंने सैमसंग और योट्टा जैसी कंपनियों के निवेश का उदाहरण देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश डेटा सेंटर और AI-आधारित टेक्नोलॉजी के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर रहा है।
इनपुट: IANS



