गुरूवार, 29 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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ग्रीन हाइड्रोजन बाज़ार में भारत का बड़ा कदम, 90,000 करोड़ के निवेश से बना दुनिया का अग्रणी सप्लायर

भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। देश की कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन और इसके उत्पादों की आपूर्ति के लिए 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से अधिक के अनुबंध हासिल कर…

ग्रीन हाइड्रोजन बाज़ार में भारत का बड़ा कदम, 90,000 करोड़ के निवेश से बना दुनिया का अग्रणी सप्लायर
(फोटो: IANS)

भारत स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक वैश्विक शक्ति बनकर उभरा है। देश की कंपनियों ने ग्रीन हाइड्रोजन और इसके उत्पादों की आपूर्ति के लिए 5.5 लाख मीट्रिक टन प्रति वर्ष (MTPA) से अधिक के अनुबंध हासिल कर लिए हैं, जिससे भारत इस मामले में दुनिया का अग्रणी देश बन गया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, इन समझौतों से देश में करीब 90,000 करोड़ रुपए (9.5 अरब डॉलर) का निवेश आया है।

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नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने बताया कि भारतीय कंपनियों ने अब तक कुल 23 बड़े आपूर्ति अनुबंध किए हैं। उन्होंने कहा, "यह महत्वपूर्ण उपलब्धि भारत को वैश्विक स्तर पर नेट-जीरो उत्सर्जन के लक्ष्य में अग्रणी बनने और हरित रोजगार सृजित करने की दिशा में आगे बढ़ा रही है।" इन समझौतों के तहत आपूर्ति की जाने वाली कुल मात्रा का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा वैश्विक निर्यात के लिए है, जो यूरोपीय और जापानी बाजारों में भारत की स्थिति को मज़बूत कर रहा है।

प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समझौते

कई भारतीय कंपनियों ने दुनिया के बड़े बाजारों के साथ महत्वपूर्ण साझेदारियाँ की हैं। इन समझौतों में ग्रीन हाइड्रोजन से बने ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल जैसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका इस्तेमाल जहाजों के ईंधन, बिजली उत्पादन और उर्वरक जैसे उद्योगों में कार्बन उत्सर्जन घटाने के लिए किया जाता है।

  • एसीएमई (ACME) ग्रुप: कंपनी ने जापान की IHI को 4,88,000 मीट्रिक टन और मित्सुबिशी गैस केमिकल को 1,00,000 मीट्रिक टन ग्रीन अमोनिया और ग्रीन मेथनॉल की आपूर्ति के लिए अनुबंध किए हैं।
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL): दक्षिण कोरिया की सैमसंग C&T के साथ 3 अरब डॉलर से अधिक का एक बड़ा सौदा किया है, जिसकी आपूर्ति 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है।
  • एलएंडटी (L&T) और इटोचू: दोनों कंपनियों ने मिलकर 3,00,000 टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए एक विशेष कंपनी बनाई है।
  • एएम ग्रीन (AM Green): इस कंपनी ने जर्मनी की यूनिपर और जापान की JERA के साथ बड़े आपूर्ति समझौते किए हैं। साथ ही, जर्मनी में एक नीलामी जीतने के बाद हिंटको के साथ 10 वर्षों के लिए 58.5 करोड़ यूरो का अनुबंध भी किया है।

इनके अलावा जूनो जूल्स और अगस्त्य जैसी अन्य कंपनियाँ भी बड़े आपूर्ति समझौतों पर काम कर रही हैं।

घरेलू मांग को भी बढ़ावा

सिर्फ निर्यात ही नहीं, देश के भीतर भी ग्रीन हाइड्रोजन की मांग बढ़ रही है। सरकार के 'स्ट्रेटेजिक इंटरवेंशन फॉर ग्रीन हाइड्रोजन ट्रांजिशन' (SIGHT) कार्यक्रम के तहत घरेलू स्तर पर भी बड़े समझौते हुए हैं। इस कार्यक्रम के माध्यम से देश की 11 उर्वरक इकाइयों को 6,70,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष ग्रीन अमोनिया की आपूर्ति के लिए अनुबंध दिए गए हैं। इसी तरह, IOCL, BPCL, और HPCL जैसी प्रमुख तेल रिफाइनरियों को भी 30,000 मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए परियोजनाएं आवंटित की गई हैं।

इनपुट: IANS

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