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विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत में 12 साल में 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, दर 57.7% से घटकर 16.1% हुई

विश्व बैंक समूह की एक हालिया रिपोर्ट में भारत की गरीबी कम करने की कोशिशों को आधुनिक इतिहास में सबसे तेज और व्यापक बताया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष…

विश्व बैंक रिपोर्ट: भारत में 12 साल में 50 करोड़ लोग गरीबी से बाहर, दर 57.7% से घटकर 16.1% हुई
(फोटो: IANS)

विश्व बैंक समूह की एक हालिया रिपोर्ट में भारत की गरीबी कम करने की कोशिशों को आधुनिक इतिहास में सबसे तेज और व्यापक बताया गया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लागू की गई लक्षित नीतियों, संरचनात्मक सुधारों और मजबूत शासन के कारण यह संभव हुआ है।

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रिपोर्ट के 'अक्टूबर 2026 पॉवर्टी एंड इक्विटी ब्रीफ' (गरीबी और समानता रिपोर्ट) खंड के मुताबिक, साल 2011 से 2023 के बीच लगभग 49.6 करोड़ भारतीय 'निम्न-मध्यम आय' वाली गरीबी रेखा से ऊपर उठने में सफल रहे। इसके परिणामस्वरूप, देश में गरीबी की दर 57.7 प्रतिशत से भारी गिरावट के साथ 16.1 प्रतिशत पर आ गई है।

रोजगार और महिला सशक्तीकरण

इस आर्थिक बदलाव में रोजगार के बढ़ते अवसरों ने एक अहम भूमिका निभाई है। आंकड़ों के अनुसार, 2017 से 2023 के बीच कुल रोजगार में 13.4 करोड़ की वृद्धि हुई, जो इस अवधि में काम करने योग्य उम्र की आबादी में हुई वृद्धि से लगभग दोगुनी है।

पीयूष गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर एक पोस्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया कि इस प्रगति में ग्रामीण महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण रहा है। उन्होंने बताया कि बड़ी संख्या में महिलाओं ने वेतन आधारित कार्यों में हिस्सा लेना शुरू किया, जिससे परिवारों में कमाने वाले सदस्यों की संख्या बढ़ी और उनकी कुल आय में भी इजाफा हुआ।

गरीबी के विभिन्न मानक और विकास

केंद्रीय मंत्री ने अपनी पोस्ट में गरीबी के अलग-अलग मानकों पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 'निम्न-मध्यम आय' गरीबी रेखा, जिसे प्रतिदिन 4.20 डॉलर (2021 पीपीपी) पर मापा जाता है, के आधार पर गरीबी 57.7% से गिरकर 16.1% रह गई है। वहीं, अगर अत्यधिक गरीबी का मानक (3 डॉलर प्रतिदिन, 2021 पीपीपी) देखें, तो यह 27.1 प्रतिशत से घटकर मात्र 2.6 प्रतिशत पर आ गई है।

विश्व बैंक का मानना है कि इन शानदार परिणामों के पीछे मजबूत खपत, महिलाओं के नेतृत्व वाला रोजगार और व्यापक सामाजिक लाभ हस्तांतरण जैसी वजहें हैं। इनमें लक्षित खाद्य सुरक्षा से लेकर सीधे लाभार्थियों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना शामिल है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि देश की 99 प्रतिशत आबादी तक बिजली की पहुंच ने लोगों के लिए जीवन स्तर को बेहतर बनाना आसान कर दिया है।

इनपुट: IANS

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