संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: भारत ने 'छिपे हुए वीटो' पर उठाए गंभीर सवाल, सुधारों में देरी की आलोचना
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो अधिकारों को लेकर चल रही बहस के बीच भारत ने एक कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने न केवल स्थायी सदस्यों के वीटो पावर, बल्कि उन 'डी फैक्टो वीटो' या छिपे हुए वीटो…
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में वीटो अधिकारों को लेकर चल रही बहस के बीच भारत ने एक कड़ा रुख अपनाया है। भारत ने न केवल स्थायी सदस्यों के वीटो पावर, बल्कि उन 'डी फैक्टो वीटो' या छिपे हुए वीटो की भी आलोचना की है, जो परिषद के सुधारों की प्रक्रिया में बाधा बन रहे हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने स्पष्ट किया कि वीटो कोई अधिकार नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है जिसका इस्तेमाल संकीर्ण राजनीतिक हितों के लिए नहीं होना चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने महासभा में सोमवार को हुई एक बहस के दौरान यह बात कही। उन्होंने बताया कि सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए चल रही 'इंटरगवर्नमेंटल नेगोशिएशन्स' (IGN) प्रक्रिया कुछ देशों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 'अप्रत्यक्ष वीटो' के कारण रुकी हुई है।
'डी फैक्टो वीटो' और सुधारों में बाधा
हरीश ने इस बात पर जोर दिया कि IGN प्रक्रिया में 'आम सहमति' की दलील को ही एक छिपे हुए वीटो की तरह इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने 'यूनाइटिंग फॉर कंसेंसस' नामक देशों के एक छोटे समूह का जिक्र किया, जिसका नेतृत्व इटली करता है और पाकिस्तान भी इसमें शामिल है। इस समूह ने प्रक्रियागत दांव-पेंच का इस्तेमाल कर IGN को बातचीत के लिए कोई मसौदा अपनाने से रोक दिया है।
हरीश ने कहा कि 2008 का महासभा प्रस्ताव, जो IGN का आधार है, 'अधिकतम राजनीतिक स्वीकृति' की बात करता है, न कि 'आम सहमति' की। उन्होंने खेद जताते हुए कहा कि बातचीत के 17 दौर पूरे होने के बाद भी कोई नतीजा नहीं निकला है, जिसका कारण यह 'व्यावहारिक वीटो' ही है।
UNSC की विश्वसनीयता और विस्तार की जरूरत
भारतीय प्रतिनिधि ने व्यापक सुधारों की वकालत करते हुए कहा कि परिषद की विश्वसनीयता, वैधता और प्रभावशीलता से जुड़े सवालों का जवाब सिर्फ वीटो को प्रबंधित करने से नहीं मिलेगा। उन्होंने कहा, "इन सवालों का जवाब एक ऐसी परिषद से मिलेगा जो अपने उद्देश्य के लिए पूरी तरह उपयुक्त हो, जिसकी संरचना आज की वास्तविकताओं को दर्शाती हो, न कि आठ दशक पहले हुए युद्ध के नतीजों को।" इसके लिए परिषद का विस्तार करने और नए स्थायी सदस्य शामिल करने की जरूरत पर बल दिया गया।
हरीश ने गुप्त वीटो की ओर भी ध्यान दिलाया, जिनका इस्तेमाल चीन द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकवादियों पर प्रतिबंध लगाने के प्रयासों को रोकने के लिए किया गया है। उन्होंने कहा, "वीटो सिर्फ वह नहीं है जिसका इस्तेमाल खुले तौर पर किया जाता है।" उन्होंने समझाया कि अध्यक्षीय बयानों और प्रतिबंध समितियों जैसे मामलों में किसी भी एक सदस्य को प्रस्ताव रोकने की अघोषित शक्ति मिल जाती है, जिसके लिए अक्सर कोई कारण भी नहीं बताना पड़ता।
नए स्थायी सदस्यों के अधिकार पर भारत का रुख
भारत ने सुधारों के बाद शामिल होने वाले नए स्थायी सदस्यों के अधिकारों पर अपना रुख साफ किया। पी. हरीश ने कहा, "हम फिर दोहराते हैं कि जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक एक सुधारी गई परिषद के सभी स्थायी सदस्यों के पास यह अधिकार होना चाहिए।" उन्होंने इसे "निष्पक्षता और न्याय" की मांग बताया। भारत ने नए सदस्यों के लिए "दूसरे दर्जे" की श्रेणियां बनाने के विचार को भी खारिज कर दिया, जैसे कि बिना वीटो वाले स्थायी सदस्य। हरीश के अनुसार, इससे सुधारों की पहले से ही जटिल प्रक्रिया और उलझ जाएगी।
इनपुट: IANS



