वैश्विक अर्थशास्त्रियों का भारत पर भरोसा बढ़ा, 98% को तेज आर्थिक वृद्धि की उम्मीद: WEF सर्वे
दुनिया के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास की संभावनाओं पर ज़बरदस्त भरोसा जताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के हालिया सर्वेक्षण में शामिल लगभग सभी (98%) मुख्य…
दुनिया के प्रमुख अर्थशास्त्रियों ने भारत की विकास की संभावनाओं पर ज़बरदस्त भरोसा जताया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के हालिया सर्वेक्षण में शामिल लगभग सभी (98%) मुख्य अर्थशास्त्रियों ने माना है कि अगले 12 महीनों में भारत की अर्थव्यवस्था मध्यम या उससे भी बेहतर गति से बढ़ेगी।
सर्वे में शामिल 74 प्रतिशत अर्थशास्त्रियों ने भारत में 'मजबूत या बहुत मजबूत' वृद्धि की संभावना जताई है, जो मई में जताए गए 52 प्रतिशत के आंकड़े से एक बड़ी छलांग है। WEF के 'चीफ इकोनॉमिस्ट आउटलुक' में शामिल सभी क्षेत्रों में भारत की विकास की संभावनाएं सबसे मज़बूत बनी हुई हैं।
घरेलू मांग बनी ताकत, महंगाई पर मिली राहत
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक गतिविधियों को मज़बूत घरेलू मांग से लगातार सहारा मिल रहा है। इसी के चलते WEF ने अगस्त में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 6.7 प्रतिशत कर दिया था। हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ऊर्जा की ऊँची कीमतें विकास के परिदृश्य पर दबाव डाल सकती हैं।
महंगाई के मोर्चे पर भी उम्मीदें बेहतर हुई हैं। मई की तुलना में अब कम अर्थशास्त्री ऊंची महंगाई की आशंका जता रहे हैं। अब 55% को मध्यम और 45% को ऊंची महंगाई की उम्मीद है, जबकि मई में 61% ऊंची या बहुत ऊंची महंगाई का अनुमान लगा रहे थे। अगस्त में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई 4.8% थी, जो रिजर्व बैंक के 2-6% के दायरे में है।
नीतियों में स्थिरता के आसार
सर्वेक्षण में शामिल अधिकांश विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की आर्थिक नीतियों में स्थिरता बनी रहेगी। 67% उत्तरदाताओं को उम्मीद है कि मौद्रिक नीति में कोई बदलाव नहीं होगा, जबकि 72% का मानना है कि राजकोषीय नीति भी अपरिवर्तित रहेगी। अगस्त में नीतिगत दर 5.25% पर स्थिर रखी गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मज़बूत आर्थिक वृद्धि और नियंत्रण में महंगाई, नीतिगत स्थिरता की इन उम्मीदों को सही ठहराते हैं।
रोज़गार और बाज़ार की स्थिति
रोज़गार के मोर्चे पर स्थिति काफी हद तक स्थिर रहने का अनुमान है। 70% अर्थशास्त्रियों को अगले 12 महीनों में बेरोज़गारी के स्तर में कोई ख़ास बदलाव की उम्मीद नहीं है। आँकड़े भी इसका समर्थन करते हैं, जहाँ 15 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में बेरोज़गारी दर जुलाई के 5.1% से घटकर अगस्त में 5% हो गई। हालांकि, शेयर बाज़ार का प्रदर्शन उतना मज़बूत नहीं रहा है। इस साल की शुरुआत से 19 अगस्त तक निफ्टी 50 में 7.9% की गिरावट देखी गई।
इनपुट: IANS



