वैश्विक सुस्ती के दौर में भी क्यों चमक रही है भारतीय अर्थव्यवस्था? रिपोर्ट में सामने आईं बड़ी वजहें
ऐसे समय में जब दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक नई रिपोर्ट के…
ऐसे समय में जब दुनिया भर में आर्थिक विकास की रफ्तार धीमी पड़ने को लेकर चिंताएं बढ़ रही हैं, भारत की अर्थव्यवस्था लगातार मजबूत वृद्धि दर्ज कर रही है। समाचार एजेंसी IANS के हवाले से आई एक नई रिपोर्ट के अनुसार, कई वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की प्रमुख विकासशील अर्थव्यवस्थाओं में सबसे आगे बना हुआ है।
यह रिपोर्ट तंजानिया के समाचार प्रकाशन 'द गार्जियन' (IPP मीडिया) में प्रकाशित हुई है। इसमें बताया गया है कि भू-राजनीतिक तनाव, ऊर्जा बाजारों में उतार-चढ़ाव और सख्त वित्तीय हालातों के बीच भी भारत ने अपनी आर्थिक मजबूती बनाए रखी है। रिपोर्ट इस बात पर प्रकाश डालती है कि कैसे प्रमुख वैश्विक संस्थान लगातार भारत के जीडीपी विकास दर के अनुमानों को बढ़ा रहे हैं, जो इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण ग्रोथ इंजन के रूप में स्थापित करता है।
मजबूत घरेलू बाजार: अर्थव्यवस्था का सुरक्षा कवच
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की सबसे बड़ी आर्थिक ताकत उसका विशाल और विविधतापूर्ण घरेलू बाजार है। घरेलू खपत, निजी निवेश और बुनियादी ढांचे पर सरकारी खर्च मिलकर आर्थिक गतिविधियों को एक ठोस आधार देते हैं। यही वजह है कि जब वैश्विक मांग में कमी आती है या अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अस्थिरता बढ़ती है, तो भी भारतीय अर्थव्यवस्था काफी हद तक सुरक्षित रहती है। बढ़ती आय, शहरीकरण और बेहतर कनेक्टिविटी के कारण ऑटोमोबाइल, आवास, पर्यटन, स्वास्थ्य और वित्तीय सेवाओं जैसे क्षेत्रों में निजी खपत लगातार बढ़ रही है, जिससे निवेश और नवाचार को भी बढ़ावा मिल रहा है।
डिजिटल बदलाव और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर
देश में डिजिटल प्लेटफॉर्म के तेजी से विस्तार ने आर्थिक गतिविधियों का तरीका बदल दिया है। डिजिटल भुगतान, ई-कॉमर्स और प्रौद्योगिकी आधारित सरकारी सेवाओं ने लेन-देन की लागत को कम किया है और बाजार तक पहुंच को आसान बनाया है। इससे छोटे व्यवसायों को भी अपने पारंपरिक भौगोलिक दायरे से बाहर निकलने का मौका मिला है। इसके साथ ही, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, बिजली और डिजिटल कनेक्टिविटी जैसे बुनियादी ढांचे में हो रहा भारी निवेश भारत की आर्थिक मजबूती को और बढ़ा रहा है, जिससे लागत घट रही है और बाजारों तक पहुंच बेहतर हो रही है।
निर्यात और विनिर्माण में तेज वृद्धि
भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में निर्यात विविधीकरण, राजकोषीय अनुशासन और ऊर्जा सुरक्षा जैसे कारक भी अहम भूमिका निभा रहे हैं। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का निर्यात 2026-27 तक 1 ट्रिलियन डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच सकता है और 2030 तक इसे 2 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य है। वहीं, विनिर्माण क्षेत्र ने भी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 9.2 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। हाल ही में, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने भी 2026 और 2027 के लिए भारत की विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जो दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में इसकी स्थिति को और पुख्ता करता है।
इनपुट: IANS



