वैश्विक सुस्ती के बीच भारत का बड़ा लक्ष्य: चालू वित्त वर्ष में 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात पर नज़र
ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की रफ़्तार धीमी पड़ने का अनुमान है, भारत ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री…
ऐसे समय में जब वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार की रफ़्तार धीमी पड़ने का अनुमान है, भारत ने चालू वित्त वर्ष के लिए एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल के मुताबिक, देश इस साल 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात को हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, यह लक्ष्य पिछले वित्त वर्ष में हासिल किए गए 863 अरब डॉलर के निर्यात से 16 प्रतिशत की सालाना वृद्धि दर्शाता है।
यह लक्ष्य इस पृष्ठभूमि में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के केवल 2.5 से 3 प्रतिशत की दर से बढ़ने की उम्मीद है, जबकि वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 3 प्रतिशत से कम रहने का अनुमान है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी चालू वर्ष के लिए अपने विकास अनुमानों को बढ़ाया है और विश्वास जताया है कि भारत 7 प्रतिशत से अधिक की दर से विकास करना जारी रखेगा, जिससे यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना रहेगा।
किसने तय किया यह लक्ष्य?
नई दिल्ली में 31वें सीआईआई पार्टनरशिप समिट को संबोधित करते हुए पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया कि 1 ट्रिलियन डॉलर के निर्यात का लक्ष्य केवल सरकार का नहीं है। उन्होंने कहा कि यह भारत के लोगों और व्यवसायों का सामूहिक संकल्प है, जिसमें 6.3 करोड़ एमएसएमई, छोटे-बड़े उद्योग, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और लगभग 2,50,000 स्टार्टअप शामिल हैं। अपने संबोधन में उन्होंने कहा, "जब दुनिया दीवारें (टैरिफ) बना रही थी, तब भारत पुल (एफटीए) बना रहा था।"
सुधार और विकास का दृष्टिकोण
केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार के प्रमुख के तौर पर 25 साल पूरे करने का भी उल्लेख किया। उन्होंने इसे भारत को एक शक्तिशाली और 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के उद्देश्य से की गई 25 वर्षों की निरंतर जन-सेवा और बेदाग कामकाज का रिकॉर्ड बताया। गोयल ने इंडिया मोबाइल कांग्रेस के 10वें संस्करण का जिक्र करते हुए यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने याद दिलाया था कि डिजिटल इंडिया मुहिम से पिछले 12 सालों में देश को 5 लाख करोड़ रुपए की बचत हुई है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमेशा आसान रास्ते के बजाय सुधार का रास्ता चुना, जिसका उदाहरण जीएसटी का कार्यान्वयन और नेशनल ग्रिड का एकीकरण है।
इनपुट: IANS



