‘इंडिया’ गठबंधन की 1 नवंबर की रैली 1984 के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा: अर्जुन राम मेघवाल
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह तारीख 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के घावों को फिर से…
केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने 'इंडिया' गठबंधन की 1 नवंबर को रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली की तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि यह तारीख 1984 के सिख विरोधी नरसंहार के घावों को फिर से हरा कर देगी। समाचार एजेंसी IANS से बातचीत में मेघवाल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर देश में अराजकता और अशांति फैलाने की कोशिश करने का भी आरोप लगाया।
मेघवाल ने कहा, "1 नवंबर की तारीख 31 अक्टूबर 1984 के बाद हुए सिख नरसंहार के घावों को फिर से हरा करने और उन पर नमक छिड़कने जैसा है। कम से कम उन्हें इस फैसले के लिए 1 नवंबर का दिन नहीं चुनना चाहिए था।" उन्होंने दावा किया कि गठबंधन के कुछ सहयोगी दल भी इस तारीख से असहमत थे, लेकिन राहुल गांधी ने अपना फैसला नहीं बदला।
अर्थव्यवस्था और त्योहारी सीजन पर असर का आरोप
केंद्रीय मंत्री ने रैली के समय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे त्योहारी सीजन में व्यापारियों को नुकसान होगा। उन्होंने कहा, "यह वह समय होता है जब व्यापारियों की बिक्री बढ़ती है और बाजारों में बड़ी संख्या में खरीदार आते हैं।" मेघवाल ने कहा कि राहुल गांधी भारतीय अर्थव्यवस्था को 'मृत अर्थव्यवस्था' बताते हैं, जबकि देश 7.8 प्रतिशत की दर से विकास कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया, "शायद उन्होंने अर्थव्यवस्था को बाधित करने और बढ़ती अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाने के लिए दीपावली के आसपास 1 नवंबर का दिन चुना।"
EVM और चुनाव प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अर्जुन राम मेघवाल ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) और मतदाता सूची के पुनरीक्षण (SIR) पर विपक्ष द्वारा बार-बार सवाल उठाए जाने की भी आलोचना की। उन्होंने पूछा, "हिमाचल प्रदेश में आप किस वोटिंग मशीन की मदद से सत्ता में आए? कर्नाटक में किस वोटिंग मशीन ने आपको सत्ता दिलाई?" उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस नेता SIR की वजह से चुनाव जीतने की बात करते हैं, लेकिन राहुल गांधी अपने ही नेताओं की नहीं सुनते। मंत्री ने इसे विपक्ष के विरोधाभासी आचरण का उदाहरण बताया।
संवैधानिक संस्थाओं के अपमान का आरोप
मेघवाल ने राहुल गांधी पर चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं को बदनाम करने के लिए झूठे और बेबुनियाद तथ्य पेश करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग विपक्ष के नेताओं से मिलने के लिए तैयार था, लेकिन विपक्ष बिना सूची दिए 300 सांसदों के साथ मिलना चाहता था, जो सिर्फ हंगामा करने का एक तरीका था।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा की निंदा की। मेघवाल ने कहा, "खड़गे कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं... उनकी भाषा संयमित होनी चाहिए।" उन्होंने खड़गे से अपनी टिप्पणी के लिए देश से माफी मांगने की मांग की।
इनपुट: IANS



