IIT मद्रास और धारवाड़ की बड़ी साझेदारी: शिक्षा, शोध और इनोवेशन को मिलेगी नई दिशा
देश के दो प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) — आईआईटी मद्रास और आईआईटी धारवाड़ — ने अकादमिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हाथ मिलाया है। गुरुवार को दोनों संस्थानों के बीच एक…
देश के दो प्रतिष्ठित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) — आईआईटी मद्रास और आईआईटी धारवाड़ — ने अकादमिक सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए हाथ मिलाया है। गुरुवार को दोनों संस्थानों के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए, जिसका उद्देश्य शिक्षा, शोध और उद्यमिता के क्षेत्रों में मिलकर काम करना है।
समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, इस कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी भी मौजूद रहे। उन्होंने इस साझेदारी को एक आदर्श मॉडल बताते हुए उम्मीद जताई कि यह भारत को ज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व दिलाने में मदद करेगी। धारवाड़ अपना लोकसभा क्षेत्र होने के कारण, जोशी ने इस समझौते पर विशेष संतोष व्यक्त किया।
साझेदारी के मुख्य उद्देश्य
इस MoU के तहत दोनों संस्थान अपने संसाधनों को साझा करेंगे ताकि उनका बेहतर इस्तेमाल हो सके। इसमें फैकल्टी और छात्रों का आदान-प्रदान, प्रयोगशालाओं, पुस्तकालयों और अनुसंधान उपकरणों तक आपसी पहुंच शामिल है। इसके अलावा, अकादमिक प्रकाशनों और शोध रिपोर्टों को भी साझा किया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने कहा, "ज्ञान बांटने से बढ़ता है। जब क्षमताएं एक साथ आती हैं तो अधिक अनुसंधान संभव होता है और जब संस्थान मिलकर काम करते हैं तो नवाचार को नई गति मिलती है।" उन्होंने सुझाव दिया कि दोनों संस्थानों को अपनी-अपनी विशेषज्ञताओं का लाभ उठाते हुए महत्वाकांक्षी संयुक्त अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करनी चाहिए।
उत्तर कर्नाटक के विकास को मिलेगी गति
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि आईआईटी धारवाड़ अपेक्षाकृत नया संस्थान होने के बावजूद लगातार अपनी क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और उत्तर कर्नाटक के शैक्षणिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि आईआईटी मद्रास जैसे अनुभवी संस्थान के साथ यह साझेदारी इस क्षेत्र में शिक्षा, शोध और उद्यमिता को और बढ़ावा देगी।
जोशी के अनुसार, आईआईटी मद्रास ने अनुसंधान, नवाचार और स्टार्टअप के क्षेत्र में एक मजबूत इकोसिस्टम विकसित किया है, जिसके अनुभव से आईआईटी धारवाड़ को बहुत लाभ मिल सकता है। उन्होंने पेटेंट, तकनीकी विकास और सामाजिक नवाचार जैसे क्षेत्रों में नए विचारों की आवश्यकता पर भी बल दिया।
इनपुट: IANS



