रविवार, 11 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
शिक्षा

हिमाचल प्रदेश: अब लोक सेवा आयोग करेगा सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भर्ती, विधानसभा में विधेयक पारित

हिमाचल प्रदेश के सभी छह सरकारी विश्वविद्यालयों में अब प्रोफेसरों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती का तरीका बदलने जा रहा है। विधानसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन)…

हिमाचल प्रदेश: अब लोक सेवा आयोग करेगा सरकारी विश्वविद्यालयों में प्रोफेसरों की भर्ती, विधानसभा में विधेयक पारित
(फोटो: IANS)

हिमाचल प्रदेश के सभी छह सरकारी विश्वविद्यालयों में अब प्रोफेसरों और अन्य कर्मचारियों की भर्ती का तरीका बदलने जा रहा है। विधानसभा ने बुधवार को ध्वनिमत से हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए कानून के तहत ये भर्तियाँ अब हिमाचल प्रदेश लोक सेवा आयोग (HPPSC) और राज्य चयन आयोग के माध्यम से की जाएँगी।

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हालांकि, विधेयक में यह स्पष्ट किया गया है कि एसोसिएट प्रोफेसरों की भर्ती की प्रक्रिया पहले की तरह संबंधित विश्वविद्यालय ही पूरी करेंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चर्चा के दौरान कहा कि इस बदलाव से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और योग्य उम्मीदवारों का चयन मेरिट के आधार पर होगा, जिसका सीधा लाभ युवाओं को मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार निजी विश्वविद्यालयों की परीक्षाएँ भी किसी नोडल एजेंसी से कराने की संभावना पर विचार कर रही है।

वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही

विधेयक में विश्वविद्यालयों के वित्तीय ढांचे को लेकर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। अब प्रदेश के वित्त सचिव अभिषेक जैन सभी छह विश्वविद्यालयों की वित्त समितियों के अध्यक्ष होंगे। इसके अलावा, विश्वविद्यालयों की कार्यकारी परिषद (EC) को वित्तीय मामलों में वित्त सचिव की अध्यक्षता वाली समिति की सिफारिशों को मानना अनिवार्य होगा। मुख्यमंत्री सुक्खू के अनुसार, इस कदम से वित्त समितियों की जवाबदेही सुनिश्चित होगी।

विपक्ष ने उठाए स्वायत्तता पर सवाल

विधेयक पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने इसे विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर हमला बताया। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालयों को अनुदान सिर्फ राज्य सरकार से ही नहीं, बल्कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) से भी मिलता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार को यह विचार करना चाहिए था कि इस विधेयक का यूजीसी से मिलने वाले अनुदान पर क्या असर पड़ेगा।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने भी विधेयक की कानूनी वैधता पर संदेह जताते हुए कहा कि यह कानूनी कसौटी पर खरा नहीं उतर पाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार के कई विधेयक पहले भी अदालतों द्वारा निरस्त किए जा चुके हैं। इस पर मुख्यमंत्री सुक्खू ने जवाब दिया कि उनकी सरकार के एक-दो विधेयक निरस्त हुए हैं, लेकिन पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी कई विधेयक अदालतों ने खारिज किए थे।

इनपुट: IANS

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