हरियाणा: भूपिंदर हुड्डा ने फसल खरीद में देरी पर सरकार को घेरा, किसानों को भारी नुकसान का आरोप
हरियाणा में फसल खरीद को लेकर राज्य की भाजपा सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर सरकार पर…
हरियाणा में फसल खरीद को लेकर राज्य की भाजपा सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नेता भूपिंदर सिंह हुड्डा ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर सरकार पर किसानों की अनदेखी का गंभीर आरोप लगाया। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, हुड्डा ने कहा कि सरकार धान और बाजरे की खरीद प्रक्रिया में तेजी लाने और खरीदे गए अनाज की ढुलाई सुनिश्चित करने में पूरी तरह नाकाम रही है।
हुड्डा ने हाल ही में हुई बारिश से हुए नुकसान का जिक्र करते हुए कहा कि सरकारी उदासीनता के चलते किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिर गया है। उन्होंने बताया कि राज्य भर की मंडियों में लाखों मीट्रिक टन धान पानी में डूब गया है, जिससे किसानों के साथ-साथ आढ़तियों को भी भारी आर्थिक क्षति उठानी पड़ी है।
खरीद प्रक्रिया पर गंभीर सवाल
पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उन्होंने प्रदेश की कई मंडियों का दौरा किया है और किसानों व कमीशन एजेंटों से बातचीत की है, लेकिन सरकारी व्यवस्थाओं से कोई भी संतुष्ट नहीं मिला। उनके मुताबिक, खरीद प्रक्रिया सुचारू रूप से नहीं चल रही है और किसानों को गेट पास, सत्यापन, खरीद सीमा, लंबे ट्रैफिक जाम और घंटों इंतजार जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने नमी मापने वाली मशीनों में छेड़छाड़ का भी आरोप लगाया और कहा कि यह सरकार की सोची-समझी साजिश है। हुड्डा ने कहा कि एक ही ढेर की उपज को तीन अलग-अलग मशीनों से जांचने पर नमी का स्तर अलग-अलग पाया गया।
MSP से कम कीमत पर बेचने को मजबूर किसान
भूपिंदर हुड्डा ने सरकार पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद से बचने का आरोप लगाते हुए कहा कि किसानों को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस रवैये के कारण किसान अपनी धान की फसल को MSP से 400 रुपये प्रति क्विंटल कम और बाजरे को 800 से 900 रुपये प्रति क्विंटल कम दाम पर निजी एजेंसियों को बेचने के लिए मजबूर हो रहे हैं। हुड्डा ने सरकार से मांग की कि वह 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने का अपना वादा पूरा करे और बारिश से हुए नुकसान की भरपाई के लिए बोनस भी दे।
इनपुट: IANS



