सोमवार, 6 जुलाई 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश में हमास की दस्तक: कट्टरपंथी समूह 'तौहीदी जनता' के जरिए पैठ बनाने की कोशिश

फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास अब दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, और इस क्रम में उसकी नजरें बांग्लादेश पर हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने बांग्लादेश में अ

बांग्लादेश में हमास की दस्तक: कट्टरपंथी समूह 'तौहीदी जनता' के जरिए पैठ बनाने की कोशिश
(फोटो: IANS)

फिलिस्तीनी आतंकी समूह हमास अब दक्षिण एशिया में अपनी मौजूदगी बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, और इस क्रम में उसकी नजरें बांग्लादेश पर हैं। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, हमास ने बांग्लादेश में अपना प्रभाव फैलाने के लिए 'तौहीदी जनता' नामक एक स्थानीय कट्टरपंथी समूह से संपर्क साधा है। भारतीय खुफिया एजेंसियां इस पूरे घटनाक्रम पर करीब से नजर बनाए हुए हैं।

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पाकिस्तान में इंटर-सर्विसेज इंटेलिजेंस (ISI) की मदद से अपनी जगह बनाने के बाद, हमास अब बांग्लादेश और श्रीलंका जैसे देशों में भी अपनी पकड़ मजबूत करना चाहता है। इसके लिए वह सीधे तौर पर काम करने के बजाय, छोटे स्थानीय समूहों पर निर्भर रहने की रणनीति अपना रहा है।

कौन है 'तौहीदी जनता'?

तौहीदी जनता बांग्लादेश में कई वर्षों से सक्रिय एक असंगठित कट्टरपंथी समूह है। एक अधिकारी के मुताबिक, "यह मुख्य रूप से कट्टरपंथी विचारों से प्रभावित युवाओं का एक ढीला-ढाला समूह है, जो इस्लाम की हिंसक व्याख्या का प्रचार करने के लिए एकजुट होता है।" इसका कोई स्पष्ट संगठनात्मक ढांचा नहीं है, जिससे एजेंसियों के लिए इस पर नजर रखना मुश्किल हो जाता है। यह समूह पहले भी बांग्लादेश में सूफी दरगाहों और बाउल सभाओं पर हमलों में शामिल रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि इस समूह की कोई एक तय विचारधारा नहीं है। कभी यह इस्लामिक स्टेट (IS) का समर्थन करता दिखता है, तो कभी अल-कायदा का। हाल के महीनों में इसने फिलिस्तीन के मुद्दे को उठाते हुए हमास को अपना समर्थन देना शुरू कर दिया है।

हमास के लिए क्यों अहम है यह समूह?

सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, हमास एक ऐसे समूह के साथ जुड़ना चाहता है जिसे ट्रैक करना मुश्किल हो। तौहीदी जनता के सदस्य अलग-अलग कट्टरपंथी संगठनों से भी जुड़े हैं, जिनमें जमातुल अंसार फिल हिंदल शरकिया, अंसारुल्लाह बांग्ला टीम (ABT) और हरकत-उल-जिहादी इस्लामी इन बांग्लादेश (HUJI) जैसे प्रतिबंधित संगठन शामिल हैं।

एक खुफिया अधिकारी ने बताया कि इंटेलिजेंस से यह पता चला है कि हमास बांग्लादेश में पैर फैलाने के लिए तौहीदी जनता से संपर्क कर रहा है। उन्होंने इसे एक "खतरनाक डेवलपमेंट" बताते हुए कहा कि यह गठबंधन बांग्लादेश की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हमास का मकसद बांग्लादेश में हमले करना नहीं, बल्कि अपनी विचारधारा का प्रसार करना है, जिसका असर अंततः भारत पर भी पड़ सकता है।

बढ़ती कट्टरपंथी गतिविधियां

हाल के समय में तौहीदी जनता काफी मुखर हो गया है। इसके सदस्य सोशल मीडिया और सड़कों पर 'कलेमा' के झंडे लेकर मुसलमानों पर कथित अत्याचार का मुद्दा उठा रहे हैं, जिसमें फिलिस्तीन पर विशेष ध्यान दिया गया है। कई मौकों पर अल-कायदा और इस्लामिक स्टेट के झंडे लहराने वालों की पहचान भी इसी समूह के सदस्यों के रूप में हुई है। यह प्रचार हमास के नैरेटिव से काफी मेल खाता है, जो इस समूह को हमास के लिए एक आदर्श सहयोगी बनाता है।

इनपुट: IANS

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News4Social वायर डेस्क

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