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गुजरात: कंप्रेस्ड बायोगैस और बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए प्रदूषण मंजूरी की शर्तें आसान, अब अलग से NOC की जरूरत नहीं

गुजरात में अब कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करना और चलाना आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए इन संयंत्रों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अलग-अलग…

गुजरात: कंप्रेस्ड बायोगैस और बायो-सीएनजी संयंत्रों के लिए प्रदूषण मंजूरी की शर्तें आसान, अब अलग से NOC की जरूरत नहीं
(फोटो: IANS)

गुजरात में अब कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बायो-सीएनजी संयंत्र स्थापित करना और चलाना आसान हो जाएगा। राज्य सरकार ने नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाते हुए इन संयंत्रों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से अलग-अलग सहमति पत्र लेने की अनिवार्यता से बड़ी राहत दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, इस कदम का मुख्य उद्देश्य सरकारी मंजूरियों में होने वाली देरी को कम करना और पूरे राज्य में एक समान व्यवस्था लागू करना है।

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गुजरात प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (GPCB) ने 28 अक्टूबर को एक सामान्य अधिसूचना जारी की है। इसके तहत, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) द्वारा संशोधित 'व्हाइट कैटेगरी' के वर्गीकरण को लागू किया गया है। इस श्रेणी में आने वाले उद्योगों को कम प्रदूषणकारी माना जाता है।

क्या हैं नए नियम और छूट?

नई व्यवस्था के मुताबिक, जो CBG और बायो-सीएनजी संयंत्र निर्धारित कच्चे माल का इस्तेमाल करते हैं और तय शर्तों को पूरा करते हैं, उन्हें अब GPCB से 'स्थापना की सहमति' (CTE) और 'संचालन की सहमति' (CTO) लेने की आवश्यकता नहीं होगी। यह अधिसूचना GPCB के 23 अक्टूबर के उस परिपत्र के बाद आई है, जिसमें 'व्हाइट कैटेगरी' के तहत आने वाली 768 औद्योगिक गतिविधियों की संशोधित सूची प्रकाशित की गई थी। पात्र CBG संयंत्रों को इस सूची में क्रमांक 763 और 768 पर रखा गया है।

सरकारी योजनाओं में मिलेगी मदद

इस फैसले से उन परियोजनाओं को विशेष लाभ मिलने की उम्मीद है, जो सरकारी योजनाओं के तहत पंजीकरण, अनुमति या वित्तीय सहायता के लिए आवेदन कर रही हैं। अब तक सरकारी विभाग या अन्य प्राधिकरण, जैसे गोबर्धन एकीकृत पंजीकरण पोर्टल, आवेदकों से CTE, CTO या अलग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) की मांग करते थे।

GPCB ने स्पष्ट किया है कि अब से किसी भी सरकारी विभाग, पंजीकरण प्राधिकरण या एजेंसी को 'व्हाइट कैटेगरी' के पात्र संयंत्रों से GPCB द्वारा जारी अलग दस्तावेज़ मांगने की ज़रूरत नहीं होगी। वे संयंत्र द्वारा GPCB को दी गई सूचना और स्व-घोषणा के आधार पर ही आवेदन प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकते हैं।

पर्यावरण नियमों का पालन रहेगा अनिवार्य

हालांकि, CTE और CTO से मिली यह छूट संयंत्रों को उनके पर्यावरणीय अनुपालन के दायित्वों से मुक्त नहीं करती है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की 12 नवंबर, 2024 को जारी अधिसूचना (GSR 703(ई)) के अनुसार, 'व्हाइट कैटेगरी' की इकाइयों को राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को निर्धारित तरीके से सूचित करना होगा। साथ ही, उन्हें लागू पर्यावरण कानूनों और विनियमों के पालन की पुष्टि करते हुए एक स्व-घोषणा पत्र भी जमा करना होगा।

इनपुट: IANS

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News4Social गुजरात डेस्क

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