बुधवार, 30 सितम्बर 2026 · नई दिल्ली
इकोनॉमी

गाड़ियों से प्रदूषण घटाने के नए नियम: सरकार ने CAFE-3 लागू किया, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन जारी

भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-3) नियमों को अधिसूचित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार…

गाड़ियों से प्रदूषण घटाने के नए नियम: सरकार ने CAFE-3 लागू किया, इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन जारी
(फोटो: IANS)

भारत में वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने नए कॉरपोरेट एवरेज फ्यूल इकोनॉमी (CAFE-3) नियमों को अधिसूचित कर दिया है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, ये नियम अप्रैल 2027 से लागू होंगे और मार्च 2032 तक प्रभावी रहेंगे। इन नियमों का मुख्य उद्देश्य वाहन निर्माताओं को अधिक ईंधन-कुशल और कम प्रदूषण फैलाने वाली गाड़ियां बनाने के लिए प्रोत्साहित करना है।

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दिलचस्प बात यह है कि सरकार ने अपने पिछले प्रस्ताव से हटते हुए छोटी पेट्रोल कारों के लिए प्रस्तावित विशेष छूट को अंतिम नियमों में शामिल नहीं किया है। पहले 909 किलोग्राम तक वजन वाली पेट्रोल कारों के लिए 3 ग्राम प्रति किलोमीटर की अतिरिक्त छूट का प्रस्ताव था, जिसका कई प्रमुख कार निर्माताओं ने विरोध किया था। अब सभी गाड़ियों के लिए एक ही फॉर्मूले के तहत कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य तय होगा।

नए फॉर्मूले से क्या बदलेगा?

सरकार ने उत्सर्जन लक्ष्य की गणना के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्मूले में अहम बदलाव किए हैं। अब रेफरेंस गाड़ी का वजन 1,170 किलोग्राम से बढ़ाकर 1,229 किलोग्राम कर दिया गया है और सालाना वजन समायोजन को भी कम रखा गया है।

इस बदलाव का असर अलग-अलग वजन की गाड़ियों पर अलग-अलग पड़ेगा। इससे हल्की गाड़ियों के बेड़े वाले निर्माताओं को थोड़ी राहत मिलेगी, जबकि भारी गाड़ियां बनाने वालों के लिए उत्सर्जन के लक्ष्य और कड़े हो जाएंगे। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2028 में 909 किलोग्राम की कार के लिए उत्सर्जन लक्ष्य लगभग 82.8 ग्राम CO2/किमी होगा, जबकि 2,500 किलोग्राम की भारी गाड़ी के लिए यह लक्ष्य लगभग 142.4 ग्राम CO2/किमी रहेगा।

इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ियों को बढ़ावा

नए CAFE-3 नियमों में स्वच्छ ईंधन वाले वाहनों को बढ़ावा देने के लिए 'सुपर-क्रेडिट सिस्टम' को बरकरार रखा गया है। इसके तहत, किसी भी निर्माता के बेड़े के कुल प्रदर्शन की गणना करते समय एक बैटरी इलेक्ट्रिक वाहन (BEV) को तीन गाड़ियों के बराबर गिना जाएगा। यही 'तीन गुना' का लाभ रेंज-एक्सटेंडेड इलेक्ट्रिक वाहनों को भी मिलेगा।

इसी तरह, फ्लेक्स-फ्यूल पर चलने वाले प्लग-इन हाइब्रिड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड वाहनों को 2.5 गुना, सिर्फ स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड को 1.6 गुना और फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को 1.1 गुना का क्रेडिट फैक्टर दिया जाएगा। साथ ही, एक क्रेडिट-डेबिट प्रणाली भी शुरू की गई है, जिसमें लक्ष्य से बेहतर प्रदर्शन करने वाले निर्माताओं को क्रेडिट मिलेगा और पिछड़ने वालों पर डेबिट लगेगा।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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