मंगलवार, 27 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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GST में 1 नवंबर से होंगे कई अहम बदलाव, छोटे निर्यातकों और उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत

वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में सुधारों का पहला चरण 1 नवंबर 2026 से लागू होने जा रहा है, जिससे कारोबारियों, खासकर छोटे निर्यातकों और कुछ उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है। समाचार…

GST में 1 नवंबर से होंगे कई अहम बदलाव, छोटे निर्यातकों और उद्योगों को मिलेगी बड़ी राहत
(फोटो: IANS)

वस्तु एवं सेवा कर (GST) व्यवस्था में सुधारों का पहला चरण 1 नवंबर 2026 से लागू होने जा रहा है, जिससे कारोबारियों, खासकर छोटे निर्यातकों और कुछ उद्योगों पर अनुपालन का बोझ कम होने की उम्मीद है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने 26 अक्टूबर को इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। इन बदलावों का ऐलान वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में 8 अक्टूबर 2026 को हुई 57वीं जीएसटी परिषद की बैठक में किया गया था।

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इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य करदाताओं के लिए प्रक्रिया को सरल बनाना, इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के प्रवाह को बेहतर करना और रिफंड प्रक्रिया में तेजी लाना है। सरकार ने इन बदलावों को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की योजना बनाई है, जिसके लिए आवश्यक तकनीकी और सिस्टम अपग्रेडेशन किए जा रहे हैं।

छोटे निर्यातकों और उद्योगों के लिए राहत

नए नियमों के तहत, डाक और कूरियर के जरिए छोटे स्तर पर निर्यात करने वालों को बड़ी राहत दी गई है। सरकार ने टैक्स भुगतान वाले निर्यात रिफंड के लिए पहले से लागू 1,000 रुपए की न्यूनतम सीमा को खत्म कर दिया है। इससे अब छोटे निर्यातक भी बिना किसी न्यूनतम सीमा के रिफंड का दावा कर सकेंगे।

इसके अलावा, उन उद्योगों को भी राहत मिली है जो 'इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर' (Inverted Duty Structure) की समस्या से जूझ रहे थे। यह वह स्थिति है, जहां कच्चे माल पर लगने वाला जीएसटी तैयार उत्पाद पर लगने वाले जीएसटी से ज़्यादा होता है। ऐसे कारोबार अब जोखिम मूल्यांकन की शर्तों के अधीन अपने पात्र रिफंड का 90% तक अग्रिम (प्रोविजनल) तौर पर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनकी वर्किंग कैपिटल पर दबाव कम होगा।

अन्य महत्वपूर्ण बदलाव

डिस्काउंट और क्रेडिट नोट: नए प्रावधानों से वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए बिक्री के बाद दिए जाने वाले डिस्काउंट का प्रबंधन आसान होगा। क्रेडिट नोट से जुड़े नियमों में स्पष्टता आने से कर अनुपालन में सुविधा होगी।

सेवा निर्यातकों को स्पष्टता: इंटरमीडियरी (मध्यस्थ) सेवाओं के लिए 'प्लेस ऑफ सप्लाई' को लेकर एक महत्वपूर्ण बदलाव किया गया है। अब इसे सेवा देने वाले के स्थान के बजाय सेवा प्राप्त करने वाले व्यक्ति का स्थान माना जाएगा। इस बदलाव से भारतीय सेवा निर्यातकों को टैक्स संबंधी स्पष्टता मिलेगी और उनकी वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सुधार हो सकता है।

रिफंड प्रक्रिया में तेजी: एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, 1 नवंबर के बाद जहां भी तकनीकी रूप से संभव होगा, रिफंड स्वीकृति प्रक्रिया को स्वचालित (ऑटोमेटेड) किया जाएगा। हालांकि, यह सुविधा केवल नए आवेदनों पर लागू होगी, पुराने लंबित मामलों पर नहीं।

अगले चरण में होंगे बड़े सुधार

जीएसटी सुधारों का अगला चरण, जिसमें व्यापक कानूनी और संरचनात्मक बदलाव शामिल हैं, 1 अप्रैल 2027 से लागू करने का लक्ष्य है। इसके लिए केंद्रीय और राज्य जीएसटी कानूनों में संशोधन की आवश्यकता होगी। इन बड़े बदलावों में गिरफ्तारी के प्रावधानों में संशोधन, अभियोजन की सीमा को तर्कसंगत बनाना, ई-वे बिल नियमों में बदलाव और कारण बताओ नोटिस जारी करने के लिए 10,000 रुपए की न्यूनतम सीमा तय करना शामिल है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि गिरफ्तारी से जुड़े प्रावधानों में होने वाले बदलाव भविष्य के मामलों पर ही लागू होंगे।

इनपुट: IANS

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News4Social बिज़नेस डेस्क

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