त्योहारी भीड़ के बीच सुरक्षित सफ़र: दिवाली-छठ के लिए रेलवे ने बनाई सुरक्षा की नई रणनीति
दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षित और सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करना…
दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहारों पर यात्रियों की भारी भीड़ को देखते हुए भारतीय रेलवे ने एक व्यापक सुरक्षा योजना तैयार की है। इसका मुख्य उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षित और सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करना है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, रेलवे सुरक्षा बल (RPF) और राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) ने विभिन्न एजेंसियों के साथ मिलकर भीड़ प्रबंधन और सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए यह रणनीति बनाई है।
यह योजना शनिवार को जारी एक आधिकारिक बयान में सामने आई, जिसमें रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) द्वारा आयोजित सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) प्रमुखों के 8वें अखिल भारतीय सम्मेलन की जानकारी दी गई। इस उच्च-स्तरीय बैठक में त्योहारों के दौरान उभरने वाली सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा हुई और राज्यों के बीच सफल सुरक्षा मॉडलों को साझा किया गया। सम्मेलन की अध्यक्षता आरपीएफ की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने की, जिसमें रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी सतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
भीड़ प्रबंधन और यात्री सुविधा
सम्मेलन में उत्तरी रेलवे के दिल्ली मंडल ने भीड़ नियंत्रण के लिए अपने विशेष मॉडल को प्रस्तुत किया। इस मॉडल में दिल्ली पुलिस, जीआरपी और दिल्ली मेट्रो के साथ समन्वय, सीसीटीवी से निगरानी, लगातार सार्वजनिक घोषणाएं, बैरिकेडिंग और यात्रियों के लिए निर्धारित प्रतीक्षा क्षेत्र बनाना शामिल है। त्योहारों के दौरान अग्रिम योजना और सुरक्षा बलों की समन्वित तैनाती पर विशेष जोर दिया गया है। इसी बैठक में एक और अहम फ़ैसला लिया गया, जिसके तहत सेंटर फॉर रेलवे इंफॉर्मेशन सिस्टम्स (CRIS) अब जीआरपी कर्मियों को 'रेलमदद' प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा। इससे यात्री शिकायतों का समाधान तेज़ी से हो सकेगा।
महिला सुरक्षा और पथराव की रोकथाम
बैठक में यात्री सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई नई पहलों पर भी चर्चा हुई। दक्षिण मध्य रेलवे ने अपना "पिंक पेट्रोल: आइज इन द स्काई, शक्ति ऑन द ग्राउंड" मॉडल पेश किया, जिसमें ड्रोन निगरानी और महिला सुरक्षाकर्मियों की त्वरित प्रतिक्रिया टीमों को एकीकृत किया गया है। इसके अलावा, ट्रेनों पर पथराव की घटनाओं को एक गंभीर चुनौती मानते हुए इस पर भी मंथन हुआ। अधिकारियों ने संवेदनशील इलाकों में गश्त बढ़ाने, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने और युवाओं में जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया।
समुदाय को जोड़ने की पहल
मध्य रेलवे के पुणे मंडल ने 'प्रोजेक्ट दिशा' की जानकारी साझा की। यह सुरक्षा, सद्भाव और जागरूकता के लिए एक समर्पित पहल है, जिसके तहत रेलवे ट्रैक के पास रहने वाले बच्चों को शिक्षा, मनोरंजन और सुरक्षा जागरूकता से जोड़ा जाता है। इस परियोजना में गैर-सरकारी संगठनों और स्थानीय समुदायों की भागीदारी से पथराव और ट्रैक पार करने जैसी खतरनाक गतिविधियों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है।
इनपुट: IANS



