शुक्रवार, 6 नवम्बर 2026 · नई दिल्ली
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बांग्लादेश: वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कपड़ा मज़दूरों पर हिंसा, मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता

बांग्लादेश में बेहतर वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कपड़ा उद्योग के हज़ारों मज़दूरों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा की कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की…

बांग्लादेश: वेतन वृद्धि की मांग कर रहे कपड़ा मज़दूरों पर हिंसा, मानवाधिकार संगठनों ने जताई गहरी चिंता
(फोटो: IANS)

बांग्लादेश में बेहतर वेतन की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे कपड़ा उद्योग के हज़ारों मज़दूरों के ख़िलाफ़ हुई हिंसा की कई प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने कड़ी निंदा की है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, ये संगठन मज़दूरों के विरोध को दबाने के लिए की गई बल-प्रयोग की कार्रवाई पर गहरी चिंता जता रहे हैं, जिसमें एक मज़दूर की मौत और सैकड़ों लोग घायल हो गए।

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यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब बांग्लादेश का गारमेंट उद्योग अशांति के दौर से गुज़र रहा है। मज़दूर कम से कम 30,000 टका (बांग्लादेशी मुद्रा) मासिक वेतन की मांग कर रहे हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन हिंसक हो गए हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, देश के कई औद्योगिक क्षेत्रों में फैले विरोध के कारण सावर और आशुलिया में 200 से अधिक कारखानों को काम बंद करना पड़ा है।

हिंसा और एक मज़दूर की मौत

अमेरिका स्थित 'ह्यूमन राइट्स वॉच' (HRW) ने कहा है कि बांग्लादेश पुलिस ने प्रदर्शनकारी मज़दूरों को तितर-बितर करने के लिए लाठियों और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। संगठन ने कारखाने के मालिकों और राजनीतिक दलों से जुड़े लोगों द्वारा हिंसा, आगजनी, और पुलिस पर हमलों की खबरों का भी उल्लेख किया है।

इसी हिंसा के दौरान गाजीपुर जिले के जॉयदेबपुर में 3 नवंबर को तौफीक हुसैन नाम के एक गारमेंट श्रमिक की मौत हो गई। गंभीर रूप से घायल होने के बाद ढाका के एक अस्पताल में उनका निधन हुआ। HRW से बात करते हुए तौफीक के एक सहकर्मी ने बताया, "उन भाड़े के लोगों ने उसे बेरहमी से पीटा था।"

हज़ारों पर आपराधिक मामले दर्ज

फ्रांस स्थित 'जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश' (JMBF) ने भी मज़दूरों पर हुई कार्रवाई की आलोचना की है। JMBF ने बांग्लादेशी मीडिया और अपने सूत्रों के हवाले से बताया कि गुरुवार तक हिंसा में कम से कम एक मज़दूर की मौत हुई, 210 से ज़्यादा घायल हुए, और 216 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसके अलावा, लगभग 19,521 लोगों के ख़िलाफ़ 18 आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।

JMBF के संस्थापक अध्यक्ष शाहनूर इस्लाम ने कहा, "गारमेंट वर्कर ऐसी मजदूरी की मांग कर रहे हैं, जिससे वे अपने परिवारों का पेट भर सकें और सम्मान के साथ जी सकें। उन्हें लाठियों, आंसू गैस, गिरफ्तारियों और हजारों आपराधिक आरोपों का सामना नहीं करना पड़ना चाहिए।" उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि तौफीक हुसैन की मौत के मामले में न्याय मिलना चाहिए, न कि राजनीतिक बहाने बनाए जाने चाहिए।

कार्रवाई पर उठते सवाल

मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि बांग्लादेशी अधिकारी मज़दूरों की जायज़ मांगों को पूरा करने के बजाय, प्रदर्शनों के लिए राजनीतिक विपक्ष को दोषी ठहरा रहे हैं। HRW ने कहा कि अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पुलिस केवल ज़रूरत पड़ने पर और उचित मात्रा में ही बल का प्रयोग करे। संगठन ने हिंसा के लिए ज़िम्मेदार लोगों को जवाबदेह ठहराने की भी मांग की है।

इनपुट: IANS

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