AI पर सख्त नियमों के डर से दुनिया भर के बाजारों में हड़कंप, निवेशकों के 3 ट्रिलियन डॉलर डूबे
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर आने वाले कड़े नियमों की आशंका ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। शुक्रवार को निवेशकों की घबराहट के कारण एशियाई बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों…
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर आने वाले कड़े नियमों की आशंका ने दुनिया भर के शेयर बाजारों में भारी उथल-पुथल मचा दी है। शुक्रवार को निवेशकों की घबराहट के कारण एशियाई बाजारों में टेक्नोलॉजी शेयरों की जमकर बिकवाली हुई, जिससे प्रमुख सूचकांक बुरी तरह लुढ़क गए। इससे पहले गुरुवार रात अमेरिकी शेयर बाजार भी इसी डर से धराशायी हो गए थे।
समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस बिकवाली की जड़ में यह चिंता है कि अगर सरकारें AI उद्योग पर सख्त नियम लागू करती हैं, तो इस सेक्टर में हो रहे भारी-भरकम निवेश की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। निवेशकों को डर सता रहा है कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर, चिप्स और डेटा सेंटर पर होने वाले खर्च में कमी आ सकती है, जिसका सीधा असर इस क्षेत्र की कंपनियों पर पड़ेगा। अमेरिकी कांग्रेस में डेमोक्रेट्स की मजबूत स्थिति से भी यह आशंका बढ़ी है कि तेजी से बढ़ते AI सेक्टर की जांच तेज हो सकती है।
एशियाई बाजारों में सुनामी
AI से जुड़ी आशंकाओं का सबसे बुरा असर एशियाई बाजारों पर देखने को मिला। दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 8 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया, जिसके चलते कुछ देर के लिए ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। इसी तरह, जापान का निक्केई लगभग 6% और ताइवान का बेंचमार्क इंडेक्स 8% से अधिक गिर गया।
खासतौर पर सेमीकंडक्टर और AI चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट दर्ज की गई। सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स के शेयर लगभग 10% गिर गए, जबकि SK Hynix को 12% का भारी नुकसान हुआ। AI में दुनिया के सबसे बड़े निवेशकों में से एक, सॉफ्टबैंक ग्रुप का शेयर भी भविष्य के मुनाफे पर चिंता के कारण 11% तक टूट गया।
अमेरिकी बाजार से शुरू हुई गिरावट
एशिया से पहले यह गिरावट गुरुवार को अमेरिकी बाजारों में शुरू हुई थी। टेक-हैवी नैस्डैक कंपोजिट 5.5% गिर गया, जबकि S&P 500 में 4% से ज्यादा की गिरावट आई। डॉउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज भी 3.4% टूटा। इस एक दिन की बिकवाली में S&P 500 कंपनियों की बाजार कीमत में लगभग 3 ट्रिलियन डॉलर की कमी आई।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस गिरावट के पीछे निवेशकों की घबराहट में की गई बिकवाली भी एक बड़ा कारण है। हालांकि, इस वैश्विक उथल-पुथल के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड लगभग 2% बढ़कर 100.31 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी WTI क्रूड भी 1% से ज्यादा चढ़कर 91.91 डॉलर पर कारोबार कर रहा था।
इनपुट: IANS



