RBI ने बताई भारतीय अर्थव्यवस्था की ताक़त और चुनौतियां, जानिए आगे क्या हैं संकेत
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं से पड़ने वाले असर पर भी आगाह किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने हाल ही में…
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बताते हुए वैश्विक अनिश्चितताओं से पड़ने वाले असर पर भी आगाह किया है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने हाल ही में हुई अपनी मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक का ब्योरा जारी किया है, जिसमें अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और भविष्य के अनुमानों पर विस्तार से चर्चा की गई है।
बैठक के विवरण के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों और सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है, जिसका असर घरेलू आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है। हालांकि, RBI का मानना है कि आपूर्ति के स्रोतों में विविधता लाने जैसे सक्रिय कदमों से इन प्रतिकूल प्रभावों को सीमित करने में मदद मिल रही है।
घरेलू मोर्चे पर क्या हैं संभावनाएं?
RBI ने बताया कि कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और अल नीनो की मजबूत स्थितियों से कृषि क्षेत्र और ग्रामीण मांग के लिए कुछ जोखिम पैदा हुए हैं। इसके बावजूद, खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार और सरकार की सक्रिय नीतियां इन चुनौतियों से निपटने में सहायक होंगी। दूसरी ओर, शहरी मांग को लेकर तस्वीर सकारात्मक है। सेवा क्षेत्र (Services Sector) में लगातार तेजी और रोजगार की स्थिर स्थिति से शहरी इलाकों में खर्च बना रहने की उम्मीद है।
इसके अलावा, निवेश के मोर्चे पर भी अच्छी संभावनाएं दिख रही हैं। उद्योग अपनी क्षमता का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं, कर्ज का प्रवाह अच्छा बना हुआ है और बुनियादी ढांचे पर सरकारी जोर से निवेश गतिविधियों को बल मिलेगा। RBI के अनुसार, सेवा निर्यात मजबूत बने रहने की उम्मीद है, जबकि द्विपक्षीय व्यापार समझौतों से वस्तुओं के निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा।
महंगाई और ब्याज दरों पर RBI का रुख
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा के अनुसार, वैश्विक उथल-पुथल के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था ने मजबूती दिखाई है। उन्होंने बताया, "वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पूरे साल की आर्थिक वृद्धि का अनुमान अब बढ़ाकर 7.1 प्रतिशत कर दिया गया है, जो अगस्त में लगाए गए 6.7 प्रतिशत के अनुमान से 40 आधार अंक अधिक है।"
हालांकि, गवर्नर ने महंगाई को लेकर चिंता भी जताई। उन्होंने कहा, "उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई के तीसरी तिमाही में सहनशीलता की ऊपरी सीमा तक पहुंचने और अगली दो तिमाहियों में 5 प्रतिशत से काफी ऊपर बने रहने का अनुमान है।"
इन्हीं सब वजहों को देखते हुए MPC ने सर्वसम्मति से रेपो दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी कर इसे 5.50 प्रतिशत करने का फैसला किया। समिति ने अपना नीतिगत रुख भी बदला है, जिसका संकेत है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की संभावना नहीं है। आगे दरें बढ़ाई जाएंगी या स्थिर रखी जाएंगी, यह आने वाले आर्थिक आंकड़ों और अनुमानों पर निर्भर करेगा।
इनपुट: IANS



