G20 बैठक में जयशंकर: ऊर्जा आपूर्ति का राजनीतिकरण ग्लोबल साउथ के लिए बेहद नुकसानदेह
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण को 'बेहद नुकसानदेह' बताते हुए कहा है कि इसका सबसे बुरा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने…
भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ऊर्जा आपूर्ति के राजनीतिकरण को 'बेहद नुकसानदेह' बताते हुए कहा है कि इसका सबसे बुरा असर ग्लोबल साउथ के देशों पर पड़ रहा है। समाचार एजेंसी IANS के मुताबिक, उन्होंने अटलांटा में जी20 विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद यह बात कही और इस मुद्दे पर समूह से ठोस कदम उठाने का आग्रह किया।
जयशंकर ने शनिवार को भारतीय पत्रकारों से बातचीत में इस बैठक को "बेहद उपयोगी, खुला और जीवंत" बताया। उन्होंने कहा कि बैठक में ऊर्जा और खाद्य सुरक्षा के अलावा भू-राजनीतिक हालात और आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी गंभीर चर्चा हुई।
ऊर्जा संकट और ग्लोबल साउथ
ऊर्जा के मुद्दे पर भारत का पक्ष रखते हुए विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा बाज़ारों में विकृति और आपूर्ति के प्रवाह का राजनीतिकरण पूरी दुनिया के लिए एक बड़ी समस्या है। उन्होंने कहा, "ऊर्जा की कमी का सबसे अधिक बोझ ग्लोबल साउथ के देश उठा रहे हैं। इसलिए इस चुनौती को केवल कुछ देशों की समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।" जयशंकर ने ज़ोर दिया कि जी20 को इस समस्या को स्वीकार करना चाहिए और इसके समाधान के लिए प्रयास करने चाहिए।
खाद्य सुरक्षा और उर्वरक संकट
बैठक में खाद्य सुरक्षा पर भी व्यापक चर्चा हुई। जयशंकर के अनुसार, यह बातचीत सिर्फ अनाज की आपूर्ति तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उर्वरकों की कमी से कृषि उत्पादन पर पड़ने वाले असर पर भी केंद्रित थी। उन्होंने बताया कि उर्वरक आपूर्ति की समस्या का एक हिस्सा काला सागर क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि दूसरा खाड़ी और लाल सागर क्षेत्र से संबंधित है। अनाज की आवाजाही में मुख्य बाधा काला सागर क्षेत्र में है।
संघर्ष का समाधान कूटनीति से
वैश्विक भू-राजनीतिक हालात पर चर्चा के दौरान भारत ने अपना रुख दोहराया कि बड़े अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान सैन्य ताकत से नहीं हो सकता। जयशंकर ने कहा कि दुनिया आज दो बड़े संघर्षों का सामना कर रही है, जिनका प्रभाव वैश्विक है। उन्होंने कहा कि भारत का संदेश था कि इन समस्याओं के हल के लिए कूटनीति, बातचीत और संवाद का रास्ता ही अपनाना होगा।
विविध आपूर्ति श्रृंखला की वकालत
भारत ने आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक विविध और भरोसेमंद बनाने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। विदेश मंत्री ने आगाह किया कि महामारी, सैन्य संघर्ष और जलवायु संबंधी घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि विनिर्माण और आपूर्ति के लिए किसी एक देश या भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भरता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा जोखिम है। उन्होंने कहा, "आज हमें अधिक विविध आपूर्ति श्रृंखलाओं की जरूरत है। विनिर्माण भी अलग-अलग स्थानों पर होना चाहिए।" जयशंकर के मुताबिक, वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को राजनीतिक या रणनीतिक हथियार बनने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका उत्पादन के कई केंद्र विकसित करना है।
अंत में, जयशंकर ने बताया कि बैठक के दौरान भारत की भूमिका की सराहना हुई, क्योंकि वह मौजूदा ध्रुवीकृत माहौल में सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखने में सक्षम है।
इनपुट: IANS



