शनिवार, 31 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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कश्मीर में अशांति फैलाने की नई ISI साज़िश: हमास के नाम पर युवाओं को भड़काने की कोशिश

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद और पाकिस्तान समर्थित प्रचार में आई कमी के बीच, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI एक नई रणनीति पर काम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के…

कश्मीर में अशांति फैलाने की नई ISI साज़िश: हमास के नाम पर युवाओं को भड़काने की कोशिश
(फोटो: IANS)

जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद आतंकवाद और पाकिस्तान समर्थित प्रचार में आई कमी के बीच, पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी ISI एक नई रणनीति पर काम कर रही है। समाचार एजेंसी IANS की एक रिपोर्ट के अनुसार, ISI अब फ़िलिस्तीन के मुद्दे और हमास के नाम का इस्तेमाल कर कश्मीर संघर्ष को एक नया वैचारिक आयाम देने की कोशिश कर रही है ताकि युवाओं को फिर से कट्टरपंथ की ओर धकेला जा सके।

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सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस नई रणनीति का बड़ा उद्देश्य कश्मीर के लोगों को यह संदेश देना है कि उनका मुद्दा केवल पाकिस्तान नहीं, बल्कि हमास जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन भी उठा रहे हैं। इसके लिए दोनों मुद्दों को 'प्रतिरोध आंदोलन' के रूप में पेश किया जा रहा है, ताकि स्थानीय लोग इससे भावनात्मक रूप से जुड़ सकें।

साझा मंच पर आतंकी संगठन

जांच एजेंसियों ने पाया है कि ISI के समर्थन से फ़िलिस्तीनी संगठन हमास और पाकिस्तान में सक्रिय जैश-ए-मोहम्मद (JeM) व लश्कर-ए-तैयबा (LeT) जैसे आतंकी संगठनों के बीच लंबे समय से करीबी संबंध रहे हैं। इसी कड़ी में 5 फरवरी 2025 को रावलकोट में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई थी, जिसका शीर्षक था, "कश्मीर एकजुटता और हमास ऑपरेशन अल-अक्सा फ्लड"। इस बैठक में इन तीनों संगठनों के सदस्य शामिल हुए थे।

इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) के एक अधिकारी ने बताया कि ऐसी बैठकों का मुख्य मकसद फ़िलिस्तीन और कश्मीर के मुद्दों को एक-दूसरे से जोड़ना था। उन्होंने कहा, "इसका बड़ा उद्देश्य जम्मू-कश्मीर में एक संदेश पहुंचाना था। अब इन बैठकों की तस्वीरें और वीडियो कश्मीर से जुड़े समूहों में फैलाने की कोशिश की जा रही है, ताकि स्थानीय लोग इस मुद्दे से खुद को जोड़ सकें और इन संगठनों का समर्थन करें।"

कमज़ोर पड़ते पाकिस्तानी नैरेटिव का तोड़

एक अन्य अधिकारी के मुताबिक, अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में हुए सकारात्मक बदलावों, जैसे आतंकवाद में कमी और पर्यटन में वृद्धि, से पाकिस्तान का प्रचार काफ़ी कमज़ोर पड़ गया है। आतंकवादी संगठनों में नई भर्तियां भी घटी हैं। ऐसे में ISI को उम्मीद है कि हमास का नाम जोड़ने से कश्मीर के कुछ युवा प्रभावित हो सकते हैं और उन्हें लग सकता है कि उनका मुद्दा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाया जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा, "संभावना है कि कुछ लोग इस प्रचार के जाल में फंस जाएं और हमास के नाम को जोड़कर चलाया जा रहा यह अभियान भर्ती बढ़ाने में मददगार साबित हो।"

अधिकारियों का मानना है कि यह वैचारिक अभियान, जैश और लश्कर द्वारा अपनाए जा रहे परिचालन बदलावों की तुलना में कहीं अधिक खतरनाक हो सकता है। इसका उद्देश्य कश्मीरियों को फिर से संघर्ष में शामिल होने के लिए उकसाना है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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