तमिलनाडु तट पर नए मौसम सिस्टम की आहट, चेन्नई में नवंबर की शुरुआत में भारी बारिश की आशंका
चक्रवात 'अर्नब' के गुजरने के बाद अब बंगाल की खाड़ी में एक और नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि इसके प्रभाव से 1 और 2 नवंबर को चेन्नई में भारी बारिश हो सकती है…
चक्रवात 'अर्नब' के गुजरने के बाद अब बंगाल की खाड़ी में एक और नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है। मौसम विशेषज्ञों ने अनुमान लगाया है कि इसके प्रभाव से 1 और 2 नवंबर को चेन्नई में भारी बारिश हो सकती है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, इस सिस्टम की तीव्रता, दिशा और तट से टकराने की संभावना को लेकर फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है, लेकिन विशेषज्ञ लगातार इस पर नजर रख रहे हैं।
यह पूर्वानुमान ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु हाल ही में चक्रवात 'अर्नब' के असर से गुजरा है, जो अब आंध्र प्रदेश और उत्तर की ओर बढ़ चुका है। नए बन रहे सिस्टम के मजबूत होकर उत्तरी तमिलनाडु की ओर बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। अगर यह चक्रवात में तब्दील होता है तो इसके चेन्नई और आंध्र प्रदेश के बीच तट से टकराने की आशंका है।
मौसम विज्ञान केंद्र का आकलन
चेन्नई स्थित क्षेत्रीय मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक डॉ. वीआर दुरई ने बताया कि मौजूदा मौसम पूर्वानुमान मॉडल इसके उत्तरी तमिलनाडु की ओर बढ़ने का संकेत दे रहे हैं। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अंतिम रास्ता अभी तय नहीं है। उनके शब्दों में, "जब तक यह सिस्टम चक्रवात में नहीं बदल जाता, तब तक यह बताना मुश्किल है कि यह किस दिशा में जाएगा और कैसे आगे बढ़ेगा। हालांकि, मौजूदा मौसम पूर्वानुमान मॉडल बताते हैं कि यह उत्तरी तमिलनाडु की ओर बढ़ सकता है।"
बारिश की तीव्रता सिस्टम के रास्ते पर निर्भर
डॉ. दुरई के अनुसार, राज्य के विभिन्न हिस्सों में होने वाली बारिश की मात्रा पूरी तरह से इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सिस्टम मजबूत होने के बाद किस रास्ते पर आगे बढ़ता है। अगर यह कावेरी डेल्टा क्षेत्र की ओर मुड़ता है, तो पूरे तमिलनाडु में अच्छी वर्षा हो सकती है। वहीं, यदि यह सिस्टम चेन्नई और उससे सटे आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ता है, तो विशेष रूप से चेन्नई शहर को भारी बारिश का सामना करना पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि 1 और 2 नवंबर को बारिश की स्थिति पूरी तरह से इस सिस्टम के विकास और उसकी दिशा पर निर्भर करेगी। जब यह और मजबूत हो जाएगा और इसका मार्ग स्पष्ट हो जाएगा, तभी इसके सटीक प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
इनपुट: IANS



