फ्रांस: वेतन वृद्धि की मांग पर देश भर में प्रदर्शन, हज़ारों कर्मचारी सड़कों पर उतरे
फ्रांस में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार को हज़ारों कर्मचारियों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब येलो वेस्ट आंदोलन, ट्रेड यूनियनों और छात्रों द्वारा…
फ्रांस में वेतन बढ़ाने की मांग को लेकर गुरुवार को हज़ारों कर्मचारियों ने देशव्यापी प्रदर्शन किया। यह विरोध प्रदर्शन ऐसे समय में हो रहा है जब येलो वेस्ट आंदोलन, ट्रेड यूनियनों और छात्रों द्वारा प्रस्तावित हड़तालों के कारण देश में तनाव का माहौल बना हुआ है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रेड यूनियनों ने यह प्रदर्शन महँगाई और जीवन-यापन की बढ़ती लागत के खिलाफ किया है।
इन प्रदर्शनों की शुरुआत सितंबर में छात्रों के विरोध से हुई थी। छात्र अपनी कक्षाओं में अत्यधिक भीड़, शिक्षकों की कमी और विश्वविद्यालयों में प्रवेश से जुड़ी समस्याओं के खिलाफ आवाज़ उठा रहे थे। बाद में ट्रेड यूनियनों ने भी छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए महंगाई और ईंधन की बढ़ती कीमतों के खिलाफ मार्च निकाले, जिससे यह आंदोलन और व्यापक हो गया।
सरकार की चिंता और सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम
प्रदर्शनों के हिंसक रूप लेने की आशंका के मद्देनज़र सरकार ने सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए हैं। फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि गुरुवार को सुरक्षा व्यवस्था के लिए 70,000 से अधिक सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों का मुख्य काम प्रदर्शनों को शांतिपूर्ण बनाए रखना और किसी भी तरह की हिंसा को रोकना है।
नुनेज के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों से संकेत मिले हैं कि कुछ कट्टर वामपंथी और हिंसक समूह इन प्रदर्शनों में घुसपैठ कर अशांति फैला सकते हैं। उनका मकसद अवैध मार्च निकालना, दुकानों-सरकारी इमारतों में तोड़फोड़ करना या लूटपाट करना हो सकता है। इसी के चलते पेरिस में ट्रेड यूनियनों के प्रस्तावित मार्च के रास्ते पर कुछ प्रतिबंध लगाए गए और एक वैकल्पिक मार्ग दिया गया। यह कदम 17 और 18 अक्टूबर को हुई हिंसा और लूटपाट की घटनाओं के बाद उठाया गया है।
बजट विधेयक और आगे की प्रक्रिया
यह विरोध प्रदर्शन उस वक्त हो रहे हैं, जब फ्रांसीसी सांसदों ने 2027 के बजट विधेयक के पहले हिस्से को खारिज कर दिया है। यूरो न्यूज के मुताबिक, सरकार का मूल बजट प्रस्ताव अब सीनेट में पेश किया जाएगा, जहाँ 9 दिसंबर को इस पर मतदान होगा। इसके बाद एक संसदीय समिति दोनों सदनों के बीच सहमति बनाने की कोशिश करेगी और फिर विधेयक को दोबारा नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा। वहीं, ट्रेड यूनियनों और मानवाधिकार संगठनों ने प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की कड़ी कार्रवाई की आलोचना की है।
इनपुट: IANS



