मणिपुर: शांति समझौते के बावजूद सक्रिय उग्रवादी गुट UNLF के 5 संदिग्ध सदस्य गिरफ्तार
मणिपुर के उखरुल जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) के पांच संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, असम राइफल्स…
मणिपुर के उखरुल जिले में सुरक्षाबलों ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ्रंट (UNLF) के पांच संदिग्ध सदस्यों को गिरफ्तार किया है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, असम राइफल्स और राज्य पुलिस ने एक खुफिया जानकारी के आधार पर इस संयुक्त अभियान को अंजाम दिया। ये गिरफ्तारियां उस वक्त हुई हैं, जब UNLF ने पिछले साल ही केंद्र और राज्य सरकार के साथ हिंसा छोड़ने का शांति समझौता किया था।
अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए संदिग्धों का संबंध 'जी-5' नामक एक गुप्त गठबंधन से माना जा रहा है। इस गठबंधन में UNLF के अलावा चार अन्य विद्रोही गुट— केसीपी, केवाईकेएल, प्रेपैक और प्रेपैक (प्रो) भी शामिल हैं। UNLF मणिपुर घाटी का सबसे पुराना उग्रवादी संगठन है, जिसकी स्थापना 1964 में हुई थी।
शांति समझौते का उल्लंघन
एक अधिकारी ने बताया कि 2023 में हुए शांति समझौते के बावजूद UNLF के कुछ गुट अब भी सक्रिय हैं। वे जी-5 के अन्य सदस्यों के साथ मिलकर लोगों को धमकाने और जबरन वसूली जैसी गतिविधियों में शामिल पाए गए हैं। इनमें से कुछ सदस्य भारत-म्यांमार सीमा के पास सक्रिय बताए जाते हैं।
इन गुटों पर राज्य में पिछले तीन वर्षों से जारी जातीय हिंसा में शामिल होने और सुरक्षाबलों पर हमला करने वाले अन्य संगठनों को लॉजिस्टिक मदद मुहैया कराने के भी आरोप हैं। हाल ही में जी-5 के सदस्यों ने 'शुमांग लीला' नाटक मंडलियों और 'संगाई महोत्सव' में भाग लेने वालों पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद सुरक्षाबलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी थी।
सुरक्षाबलों पर हमले और भर्ती का भंडाफोड़
इस साल जुलाई में उखरुल जिले में म्यांमार सीमा के पास असम राइफल्स के एक काफिले पर हुए हमले में दो सैनिक शहीद हो गए थे। हालांकि किसी भी संगठन ने इसकी जिम्मेदारी नहीं ली, लेकिन इसके पीछे जी-5 का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है।
एक अधिकारी ने बताया, "हमने उनसे कुछ सामग्री जब्त की है, जिसकी जांच की जा रही है।" उन्होंने यह भी खुलासा किया कि जी-5 के सदस्य राज्य के युवाओं की भर्ती कर उन्हें प्रशिक्षण के लिए म्यांमार स्थित कैंपों में भेज रहे हैं। सुरक्षाबलों ने हाल ही में ऐसे ही एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है।
इनपुट: IANS



