बुधवार, 7 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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रेणुकास्वामी मर्डर केस: आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के खिलाफ अभिनेता दर्शन की पत्नी सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेणुकास्वामी हत्याकांड में एक अहम मोड़ आ गया है। इस मामले में जेल में बंद कन्नड़ अभिनेता दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी ने एक आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के…

रेणुकास्वामी मर्डर केस: आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के खिलाफ अभिनेता दर्शन की पत्नी सुप्रीम कोर्ट पहुँचीं
(फोटो: IANS)

कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री को हिलाकर रख देने वाले रेणुकास्वामी हत्याकांड में एक अहम मोड़ आ गया है। इस मामले में जेल में बंद कन्नड़ अभिनेता दर्शन की पत्नी विजयलक्ष्मी ने एक आरोपी को सरकारी गवाह बनाने के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। समाचार एजेंसी IANS के अनुसार, शीर्ष अदालत इस याचिका पर बुधवार को सुनवाई के लिए तैयार हो गई है।

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जस्टिस जे.बी. पारदीवाला की अध्यक्षता वाली एक खंडपीठ इस मामले की सुनवाई करेगी। याचिका में आरोपी प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह (अप्रूवर) का दर्जा दिए जाने को चुनौती दी गई है। विजयलक्ष्मी ने अपनी याचिका में निचली अदालत और कर्नाटक हाईकोर्ट, दोनों के उन आदेशों को रद्द करने की मांग की है, जिनके तहत प्रदोष को गवाह बनने की इजाजत दी गई थी।

क्या है पूरा मामला?

इस चर्चित हत्याकांड में अभिनेता दर्शन थूगुदीपा, अभिनेत्री पवित्रा गौड़ा और 15 अन्य लोगों पर बेंगलुरु की सिटी सिविल एंड सेशन कोर्ट में मुकदमा चल रहा है। उन पर जून 2024 में 33 वर्षीय फार्मेसी कर्मचारी रेणुकास्वामी का अपहरण, प्रताड़ना और हत्या करने का आरोप है।

प्रदोष, जो इस केस में 14वें नंबर का आरोपी और अभिनेता दर्शन का करीबी सहयोगी है, ने अगस्त 2026 में सरकारी गवाह बनने के लिए आवेदन किया था। निचली अदालत ने इस शर्त पर उसकी याचिका मंजूर कर ली कि वह घटना का पूरा सच बताएगा। इसके बाद प्रदोष ने कोर्ट में करीब तीन घंटे तक अपना विस्तृत बयान भी दर्ज कराया, जिसमें उसने हत्या की रात पत्तनगेरे शेड में हुई घटनाओं का ब्योरा दिया।

हाईकोर्ट ने बरकरार रखा था फैसला

निचली अदालत के फैसले के खिलाफ दर्शन और उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी ने कर्नाटक हाईकोर्ट का रुख किया था। हाईकोर्ट ने प्रदोष को गवाही देने की अनुमति तो बरकरार रखी, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि ट्रायल के दौरान अन्य आरोपियों को उससे जिरह करने का पूरा अधिकार होगा। इसी फैसले के खिलाफ अब सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की गई है।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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