गुरूवार, 8 अक्टूबर 2026 · नई दिल्ली
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रेणुकास्वामी हत्याकांड: अभिनेता दर्शन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सह-आरोपी प्रदोष बने रहेंगे सरकारी गवाह

कन्नड़ अभिनेता दर्शन के लिए रेणुकास्वामी हत्याकांड में कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक सह-आरोपी प्रदोष…

रेणुकास्वामी हत्याकांड: अभिनेता दर्शन को सुप्रीम कोर्ट से झटका, सह-आरोपी प्रदोष बने रहेंगे सरकारी गवाह
(फोटो: IANS)

कन्नड़ अभिनेता दर्शन के लिए रेणुकास्वामी हत्याकांड में कानूनी मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को उनकी पत्नी विजयलक्ष्मी द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें एक सह-आरोपी प्रदोष एस. राव को सरकारी गवाह (अप्रूवर) बनाने के फैसले को चुनौती दी गई थी। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष अदालत के इस कदम ने प्रदोष के सरकारी गवाह बने रहने पर निचली अदालत और कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसलों पर मुहर लगा दी है।

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सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने इस मामले में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए कहा कि ऐसा करने का कोई आधार नहीं है और याचिका में कोई मेरिट नहीं है। यह घटनाक्रम दर्शन के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि प्रदोष का बयान बुधवार को ही बेंगलुरु की एक निचली अदालत में दर्ज किया जा चुका है और अब यह मुकदमे में साक्ष्य का हिस्सा होगा।

याचिका में क्या थीं दलीलें?

सुनवाई के दौरान दर्शन के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी नंबर 14, प्रदोष को सरकारी गवाह बनाने में निर्धारित प्रक्रिया और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया गया। हालांकि, अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। पीठ ने स्पष्ट किया कि बचाव पक्ष के पास जिरह के दौरान प्रदोष से सवाल करने और उनकी गवाही की विश्वसनीयता को परखने का पूरा अवसर रहेगा। दर्शन के वकीलों द्वारा अतिरिक्त समय की मांग को भी अदालत ने यह कहते हुए अस्वीकार कर दिया कि वे मामले से जुड़ी प्रासंगिक सामग्री पहले ही देख चुके हैं।

सरकारी गवाह की भूमिका क्यों अहम?

सुप्रीम कोर्ट ने मुकदमे की कार्यवाही का भी संज्ञान लिया, जिसमें यह बात सामने आई कि मृतक रेणुकास्वामी की मां अपने बयान से मुकर गई हैं। इन परिस्थितियों को देखते हुए पीठ ने टिप्पणी की कि मामले में एक सरकारी गवाह की मौजूदगी आवश्यक हो सकती है। प्रदोष को पहले इस मामले में आरोपी बनाया गया था, लेकिन बाद में निचली अदालत ने उन्हें सरकारी गवाह बनने की अनुमति दे दी थी, जिसे कर्नाटक हाईकोर्ट ने भी सही ठहराया था।

अब आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद, दर्शन और अन्य आरोपियों के पास प्रदोष के सरकारी गवाह के दर्जे को ऊपरी अदालतों में चुनौती देने के विकल्प समाप्त हो गए हैं। अब उन्हें मुकदमे के दौरान ही प्रदोष के बयान और उससे जुड़े सबूतों का सामना करना होगा। गौरतलब है कि रेणुकास्वामी हत्याकांड जून 2024 में सामने आया था, जब बेंगलुरु में उनका शव मिला था। इस मामले में अभिनेता दर्शन समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था और वे सभी मुकदमे का सामना कर रहे हैं।

इनपुट: IANS

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News4Social नेशनल डेस्क

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