मणिपुर: जातीय हिंसा के कारण पर्यटन उद्योग संकट में, पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट
मणिपुर में पिछले कुछ समय से जारी जातीय हिंसा का सीधा और गहरा असर राज्य के पर्यटन क्षेत्र पर पड़ा है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने खुद यह जानकारी दी है कि हिंसा के चलते प्रदेश में पर्यटकों की…
मणिपुर में पिछले कुछ समय से जारी जातीय हिंसा का सीधा और गहरा असर राज्य के पर्यटन क्षेत्र पर पड़ा है। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने खुद यह जानकारी दी है कि हिंसा के चलते प्रदेश में पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट आई है। समाचार एजेंसी IANS की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने यह बात रविवार को विश्व पर्यटन दिवस 2026 के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम में कही।
बिष्णुपुर जिले के मोइरांग खुनौ स्थित संगाई जातीय पार्क में हुए इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के साथ राज्यपाल अजय कुमार भल्ला भी मौजूद थे। इसका विषय 'डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पर्यटन का पुनर्निर्माण' रखा गया था।
कानून-व्यवस्था और पर्यटन का संबंध
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने शांतिपूर्ण माहौल को पर्यटन के लिए अनिवार्य बताते हुए सिक्किम का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि सिक्किम जैसे छोटे और शांत राज्य में एक साल में 17 लाख से ज़्यादा पर्यटक आते हैं, जिसका श्रेय वहां की स्थिर कानून-व्यवस्था को जाता है। इसके विपरीत, मणिपुर में शांति के अभाव में पर्यटक नहीं आ रहे हैं।
उन्होंने आंकड़ों के ज़रिए स्थिति की गंभीरता को समझाया। 2023 में हिंसा शुरू होने से पहले मणिपुर में लगभग 1.75 लाख पर्यटक आते थे, जो उस वक्त मिज़ोरम आने वाले पर्यटकों से भी ज़्यादा था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। वर्तमान में मिज़ोरम में 8 लाख से अधिक पर्यटक पहुंच रहे हैं, जिससे पड़ोसी राज्य के राजस्व में वृद्धि हुई है, जबकि मणिपुर में पर्यटकों का आना लगभग थम गया है।
सुधार के लिए सामूहिक प्रयास ज़रूरी
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सिर्फ सरकार अकेले राज्य में शांति स्थापित नहीं कर सकती, इसके लिए सभी पक्षों को मिलकर प्रयास करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि केवल पर्यटन स्थलों को सुंदर बना देना ही काफी नहीं है, बल्कि विदेशी पर्यटकों के लिए सुविधाओं और यात्रा कार्यक्रमों में भी व्यापक सुधार की आवश्यकता है।
इस अवसर पर राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कहा कि मणिपुर के पर्यटन की असली ताकत यहां के लोग, समुदाय, जीवनशैली और मेहमानों के स्वागत की परंपरा है। उन्होंने कहा कि सरकार होमस्टे को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है, ताकि पर्यटन से होने वाली आय सीधे स्थानीय लोगों तक पहुंच सके।
इनपुट: IANS



